— शिक्षक ऐप में फर्जी उपस्थिति दर्ज कराने का मामला उजागर, जिला शिक्षा अधिकारी ने दोनों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अतिथि शिक्षक कार्य से किया पृथक
मध्यप्रदेश के सिंगरौली में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर बड़ी लापरवाही और फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। विद्यालय से अनुपस्थित रहने के बावजूद मोबाइल के माध्यम से शिक्षक ऐप पर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने के मामले में जिला शिक्षा अधिकारी ने सख्त कार्रवाई की है। मामले में दोषी पाए गए दो अतिथि शिक्षकों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अतिथि शिक्षक कार्य से पृथक करते हुए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। अब दोनों शिक्षक किसी भी शासकीय अथवा अशासकीय संस्था में अध्यापन कार्य नहीं कर सकेंगे।
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय सिंगरौली से 2 नवंबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय बहनी, संकुल केंद्र बरका, विकासखंड देवसर में कार्यरत अतिथि शिक्षक वर्ग-2 गणित राकेश कुमार यादव और अतिथि शिक्षक वर्ग-2 अंग्रेजी जितेंद्र सिंह के विरुद्ध विद्यालय में अनुपस्थित रहने के बावजूद ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने की शिकायत प्राप्त हुई थी।
शिकायत के आधार पर 24 अक्टूबर 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा वीडियो कॉलिंग के माध्यम से विद्यालय और अतिथि शिक्षक उपस्थिति पंजी का निरीक्षण किया गया। जांच में सामने आया कि राकेश कुमार यादव 22 से 24 अक्टूबर तक विद्यालय में उपस्थित नहीं थे और उपस्थिति पंजी में उनके हस्ताक्षर भी नहीं थे। इसके बावजूद शिक्षक ऐप और एजुकेशन पोर्टल पर उनकी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज पाई गई।
मामले में कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर तीन दिवस में जवाब मांगा गया था। राकेश कुमार यादव ने अपने जवाब में स्वीकार किया कि वह संबंधित दिनों में विद्यालय में भौतिक रूप से उपस्थित नहीं थे, जबकि शिक्षक ऐप पर उनकी उपस्थिति दर्ज की गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि विद्यालय में कार्यरत अतिथि शिक्षक जितेंद्र सिंह ने राकेश कुमार यादव की अनुपस्थिति के दौरान वीडियो रिकॉर्ड कर विद्यालय परिसर से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने में सहयोग किया था।
जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश में उल्लेख किया गया है कि दोनों अतिथि शिक्षकों का यह कृत्य शिक्षकीय गरिमा के विपरीत और दंडनीय है। इसके बाद राकेश कुमार यादव और जितेंद्र सिंह को शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अतिथि शिक्षक कार्य से पृथक करते हुए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।
इस कार्रवाई के बाद अब दोनों अतिथि शिक्षक आगामी शैक्षणिक सत्र में किसी भी शासकीय अथवा अशासकीय संस्था में अध्यापन कार्य नहीं कर सकेंगे। शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई को विद्यालयों में ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था के दुरुपयोग पर सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

