Dindori News : करोड़ों के कथित धान की कमी वाला पुराना मामला फिर चर्चा में, क्या खुलेगी जांच की बंद फाइल…?

Rathore Ramshay Mardan
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वर्तमान में कुछ राइस मिलों पर हो रही जांच के बीच उठे सवाल, जिले की सभी मिलों और ट्रेडिंग फर्मों के स्टॉक, खरीदी एवं मिलिंग रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच की मांग

डिंडौरी। जिले में राइस मिलों और धान के कारोबार को लेकर जांच एवं कार्रवाई की चर्चाओं के बीच अब वर्षों पुराने एक कथित मामले को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। बताया जाता है कि कुछ वर्ष पहले जिले की एक राइस मिल में जांच के दौरान करोड़ों रुपये मूल्य के धान की कथित कमी सामने आई थी। इस मामले में कानूनी कार्रवाई होने और प्रकरण न्यायालय में लंबित रहने की बात भी स्थानीय स्तर पर चर्चा में है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या वर्तमान कार्रवाई के साथ उस पुराने मामले की फाइल भी दोबारा खंगाली जाएगी?

दरअसल, जिले में इन दिनों कुछ राइस मिलों पर धान की बिक्री और कथित अनियमितताओं को लेकर जांच की चर्चा है। कार्रवाई के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि जांच का दायरा आखिर कुछ चुनिंदा मिलों तक ही क्यों सीमित दिखाई दे रहा है? यदि धान खरीदी, भंडारण, परिवहन, मिलिंग और चावल जमा करने की प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका है, तो जिले की सभी संबंधित राइस मिलों की जांच समान मानकों पर क्यों नहीं की जा रही?

पुराने मामले की जांच पर भी उठे सवाल

स्थानीय स्तर पर चर्चा में आए पुराने प्रकरण में करोड़ों रुपये मूल्य के धान की कथित कमी की बात कही जा रही है। बताया जाता है कि मामले में कानूनी कार्रवाई भी हुई थी। हालांकि, अब तक इस प्रकरण में वास्तविक कमी कितनी थी, कितनी वसूली हुई, जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई और न्यायालय में मामला किस स्थिति में है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। ऐसे में प्रशासन से पुराने प्रकरण की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करने की मांग उठ रही है।

वर्तमान कारोबार और स्टॉक की भी हो जांच

चर्चा में आए पुराने प्रकरण से जुड़ी बताई जा रही राइस मिल को लेकर स्थानीय स्तर पर एक और सवाल उठ रहा है। बताया जाता है कि मिल में धान लेकर पहुंचने वाले वाहनों की लंबी कतारें दिखाई देती हैं। ऐसे में सवाल है कि संबंधित मिल के वर्तमान धान स्टॉक, आवक-जावक, खरीदी, भंडारण और मिलिंग का रिकॉर्ड कितनी गंभीरता से जांचा गया है? क्या पुराने मामले से जुड़े रिकॉर्ड और वर्तमान कारोबार का भी मिलान किया गया है?

सिर्फ चुनिंदा मिलों पर कार्रवाई क्यों?

धान उपार्जन से लेकर मिलिंग और चावल जमा करने तक की पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता जरूरी है। यदि किसी मिल में अनियमितता की शिकायत पर जांच हो सकती है, तो जिले की अन्य संबंधित राइस मिलों और उनसे जुड़ी ट्रेडिंग फर्मों को भी जांच के दायरे में लिया जाना चाहिए। जांच का आधार समान होना चाहिए, ताकि किसी भी फर्म या मिलर को लेकर पक्षपात अथवा भेदभाव की आशंका न रहे।

अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वर्तमान जांच का दायरा बढ़ाकर सभी संबंधित राइस मिलों तक पहुंचाया जाएगा या नहीं। साथ ही वर्षों पुराने करोड़ों रुपये मूल्य के धान की कथित कमी वाले प्रकरण की फाइल भी दोबारा खुलेगी या यह मामला पुरानी चर्चाओं तक ही सीमित रह जाएगा?

 

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