— डिंडौरी जिले में बुधवार देर शाम से बदला मौसम, बजाग के कोंदाटोला में धान की खड़ी फसल जमीन पर गिरी; करंजिया-बजाग क्षेत्र में अधिक बारिश की सूचना
डिंडौरी। जिले में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बुधवार देर शाम से जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में आसमान पर बादल छाए हुए हैं। रात से रुक-रुककर हो रही हल्की बारिश के बीच तेज आंधी-तूफान के कारण बजाग क्षेत्र के ग्राम कोंदाटोला में धान की खड़ी फसल जमीन पर गिर गई। इससे प्रभावित किसान को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। वहीं, करंजिया और बजाग विकासखंड में अपेक्षाकृत अधिक बारिश होने की जानकारी सामने आई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 28 अक्टूबर 2026 को ग्राम कोंदाटोला, ग्राम पंचायत सड़वाछापर माल, पोस्ट जुगदेई, चौकी गोपालपुर, तहसील बजाग क्षेत्र में तेज आंधी-तूफान और बारिश के कारण खेत में लगी धान की फसल पूरी तरह जमीन पर गिर गई। किसान के अनुसार, मौसम खराब होने से पहले फसल अच्छी स्थिति में थी और खेत में धान की फसल खड़ी हुई थी। अचानक आए आंधी-तूफान ने फसल को जमीन पर गिरा दिया।
पकने से पहले खेतों में बिछी फसल
बताया गया है कि धान की फसल अभी पूरी तरह पककर तैयार नहीं हुई है। ऐसे में फसल के जमीन पर गिर जाने से उसके खराब होने की आशंका बढ़ गई है। लगातार नमी और खेत में पानी जमा रहने की स्थिति में धान की गुणवत्ता तथा पैदावार प्रभावित हो सकती है। किसान के लिए यह स्थिति आर्थिक रूप से नुकसानदायक साबित हो सकती है।
मौसम के बदलाव से जिलेभर के किसानों की बढ़ी चिंता
डिंडौरी जिले में धान की फसल तैयार होने के दौर में बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका के बीच किसानों को मौसम साफ होने का इंतजार है। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहता है, तो फसल की स्थिति और खराब हो सकती है।
फसल नुकसान के सर्वे की जरूरत
कोंदाटोला में धान की फसल गिरने की जानकारी सामने आने के बाद प्रभावित खेत का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन किया जाना जरूरी है। कृषि विभाग और संबंधित प्रशासनिक अमले द्वारा फसल की वास्तविक स्थिति का जायजा लेकर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है। इससे प्रभावित किसान को संभावित राहत और सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाए जा सकेंगे। फिलहाल, मौसम में आए बदलाव के बीच जिले के किसानों की चिंता बढ़ गई है। अब देखना होगा कि आगामी दिनों में मौसम कैसा रहता है और प्रभावित फसल को कितना नुकसान पहुंचता है।

