— आंगनवाड़ी केंद्रों की नियमित निगरानी के निर्देश, गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए वाहन नहीं मिलने पर मिलेगी एक हजार रुपये की सहायता राशि
डिंडौरी। जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं तथा पोषण कार्यक्रमों में लापरवाही को लेकर कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने सख्त रुख अपनाया है। जिला स्वास्थ्य समिति एवं महिला बाल विकास विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि गर्भवती महिलाओं के पंजीयन, स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण और बच्चों के पोषण संबंधी कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति में लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर वेतन रोकने की कार्रवाई सहित नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे।
बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिव्यांशु चौधरी सहित स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास विभाग के जिला एवं विकासखंड स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। इस दौरान विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, टीकाकरण, पोषण और विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
कलेक्टर ने गर्भवती महिलाओं के पंजीयन और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश देते हुए कहा कि जिले में कोई भी गर्भवती महिला पंजीयन से वंचित नहीं रहनी चाहिए। गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच, निर्धारित टीकाकरण और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान कर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाए। एनीमिया की जांच एवं उपचार तथा गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप के प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया।
कलेक्टर ने कहा कि गर्भावस्था की अवधि नौ माह होती है। ऐसे में नौ माह की गर्भवती महिला की जानकारी समय पर नहीं होना गंभीर लापरवाही है। समय पर निगरानी और स्वास्थ्य परीक्षण से संभावित जटिलताओं की पहचान कर महिला को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए नियमित प्रशिक्षण और कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश भी दिए। कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर वेतन रोकने का प्रस्ताव भेजने सहित नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा।
आंगनवाड़ी केंद्रों की निगरानी में लापरवाही पर कार्रवाई
महिला एवं बाल विकास विभाग को आंगनवाड़ी केंद्रों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण के दौरान बच्चों की उपस्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और पोषण व्यवस्था की स्थिति पर विशेष नजर रखने को कहा गया। कलेक्टर ने निर्देशित किया कि बच्चों को निर्धारित मीनू के अनुसार पोषण आहार उपलब्ध कराया जाए तथा उनके पोषण स्तर की नियमित जांच की जाए। कुपोषण की स्थिति सामने आने पर समय पर उपचार और आवश्यक पोषण प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। निगरानी एवं निरीक्षण में लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध निलंबन के प्रस्ताव सहित नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
निजी वाहन से अस्पताल पहुंचने पर मिलेगी एक हजार रुपये की सहायता
बैठक में गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। स्वास्थ्य विभाग की ओर से बताया गया कि यदि किसी गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचने के लिए शासकीय वाहन उपलब्ध नहीं हो पाता है, तो आशा कार्यकर्ता के माध्यम से वरिष्ठ अधिकारी को सूचना देकर निजी वाहन से अस्पताल पहुंचने पर नियमानुसार एक हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य जरूरत के समय गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में होने वाली परेशानी को कम करना है।
टीबी मरीजों और बच्चों के स्वास्थ्य पर भी जोर
कलेक्टर ने राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए टीबी मरीजों की समय पर जांच, उपचार और पोषण सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम और पोषण पुनर्वास केंद्र की गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। चिन्हित बच्चों का समय पर उपचार और जरूरत के अनुसार उन्हें उच्च स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर करने को कहा गया।
कलेक्टर ने स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग को आपसी समन्वय से काम करते हुए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार लाने तथा बच्चों में कुपोषण की स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और जिला कार्यक्रम अधिकारी को विकासखंड स्तर पर नियमित समीक्षा बैठक आयोजित कर योजनाओं की प्रगति की निगरानी करने तथा निर्धारित लक्ष्यों की शत-प्रतिशत पूर्ति सुनिश्चित करने को कहा गया।
