— डिंडौरी में प्रधानमंत्री पोषण आहार योजना पर संकट, भुगतान नहीं होने से कई समूहों ने भोजन बनाना किया बंद
डिंडौरी। जिले में स्कूली बच्चों को पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री पोषण आहार योजना के संचालन पर भुगतान की समस्या का असर पड़ता दिखाई दे रहा है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में योजना से जुड़े रसोइयों और स्व-सहायता समूहों का कहना है कि उन्हें जुलाई माह से अब तक मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। वहीं भोजन तैयार करने में लगने वाली लागत राशि का भुगतान भी समय पर नहीं होने की बात सामने आ रही है। लगातार भुगतान अटकने के कारण कई स्व-सहायता समूहों के सामने योजना के तहत भोजन तैयार करने और व्यवस्थाओं को जारी रखने में आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
दरअसल रसोइयों और समूहों का दावा है कि कई महीनों से मानदेय नहीं मिलने के कारण उनके लिए रोजमर्रा के खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। दूसरी ओर, भोजन सामग्री की व्यवस्था के लिए मिलने वाली राशि का भुगतान नहीं होने से समूहों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। स्थिति यह है कि कुछ स्थानों पर समूहों द्वारा बच्चों के लिए भोजन बनाना बंद किए जाने की बात भी सामने आई है।
भुगतान नहीं होने से बढ़ता जा रहा आर्थिक संकट
प्रधानमंत्री पोषण आहार योजना के तहत स्कूलों में विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संबंधित समूहों और रसोइयों की होती है। इसके लिए भोजन तैयार करने की लागत राशि तथा रसोइयों को निर्धारित मानदेय का प्रावधान है। लेकिन डिंडौरी जिले में भुगतान लंबित रहने से योजना से जुड़े लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
रसोइयों का कहना है कि वे नियमित रूप से स्कूलों में पहुंचकर भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी निभाते हैं, लेकिन कई माह से उन्हें उनके मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। ऐसे में बिना भुगतान के लगातार काम करना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है।
भोपाल तक पहुंची रसोइयों और समूहों की आवाज
भुगतान की समस्या को लेकर जिले के रसोइयों और स्व-सहायता समूहों से जुड़े लोगों ने अपनी मांगों को लेकर भोपाल में भी धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के माध्यम से लंबित मानदेय और योजना की लागत राशि का भुगतान किए जाने की मांग उठाई गई। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर भुगतान की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने की बात रसोइयों और समूहों द्वारा कही जा रही है।
बच्चों के पोषण पर भी पड़ सकता है असर
प्रधानमंत्री पोषण आहार योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों को पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराना है। योजना के संचालन में रसोइयों और स्व-सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि भुगतान संबंधी समस्या के कारण समूह भोजन तैयार करने से पीछे हटते हैं तो इसका सीधा असर स्कूलों में योजना के नियमित संचालन पर पड़ सकता है।
डिंडौरी जैसे आदिवासी बहुल जिले में बड़ी संख्या में विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में अध्ययन करते हैं। ऐसे में योजना से जुड़े भुगतान में लगातार देरी का मामला केवल रसोइयों और समूहों की आर्थिक समस्या तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार की नियमितता से भी जुड़ा हुआ है।
जिम्मेदार विभाग से भुगतान की उम्मीद
रसोइयों और स्व-सहायता समूहों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि जुलाई माह से लंबित मानदेय का भुगतान शीघ्र किया जाए तथा प्रधानमंत्री पोषण आहार योजना के तहत भोजन की लागत राशि का भी समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि यदि लंबित राशि का भुगतान नहीं हुआ तो योजना के संचालन में और अधिक कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं।
अब सवाल यह है कि आखिर चार माह से लंबित मानदेय और भोजन की लागत राशि का भुगतान कब तक होगा और डिंडौरी जिले में प्रधानमंत्री पोषण आहार योजना से जुड़े रसोइयों एवं स्व-सहायता समूहों को आर्थिक संकट से कब राहत मिलेगी। मामले में संबंधित विभाग की ओर से भुगतान की स्थिति और देरी के कारणों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना भी महत्वपूर्ण है।

