— 2010-11 से पहले नियुक्त शिक्षकों को परीक्षा से मुक्त करने की मांग तेज, केंद्र सरकार तक पहुंचा ज्ञापन
मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर देशभर के लाखों शिक्षकों की चिंता के बीच अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा मध्यप्रदेश के प्रमुख घटक शासकीय शिक्षक संगठन ने सांसदों से मुलाकात कर वर्ष 2010-11 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET परीक्षा से मुक्त रखने की मांग उठाई है। संगठन के पदाधिकारियों ने खजुराहो सांसद एवं पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वी.डी. शर्मा तथा शहडोल सांसद हिमाद्रि सिंह को ज्ञापन सौंपकर इस संबंध में संसद के आगामी मानसून सत्र में आवश्यक संशोधन कराने की मांग की।
विजयराघवगढ़ में आयोजित बैठक के दौरान संगठन के तहसील अध्यक्ष पंडित संदीप मिश्रा के नेतृत्व में शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने सांसद वी.डी. शर्मा से मुलाकात की। इस दौरान संगठन के जिला उपाध्यक्ष हरीश दुबे ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के प्रावधानों के आधार पर निर्णय देते हुए वर्ष 2011 के पूर्व नियुक्त ऐसे शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा देने की आवश्यकता बताई है, जिनकी सेवानिवृत्ति 1 सितंबर 2025 की स्थिति में पांच वर्ष से अधिक दूर है।
शिक्षक संगठन ने इसे प्राकृतिक न्याय की अवधारणा के विपरीत बताते हुए कहा कि जिन शिक्षकों ने 25 से 30 वर्ष या उससे अधिक समय तक शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं दी हैं, उन पर नियुक्ति के वर्षों बाद नई पात्रता शर्त लागू करना उचित नहीं है। संगठन ने सांसद से मांग की कि केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र में RTE नियमों में संशोधन कर पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट प्रदान करे।
सांसद वी.डी. शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि शिक्षकों की मांगों को गंभीरता से केंद्र सरकार के समक्ष रखा जाएगा तथा संसद के वर्षाकालीन सत्र में इस विषय पर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए सरकार संवेदनशील है और किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
इसी क्रम में शासकीय शिक्षक संगठन के प्रांतीय सचिव संजीव त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष विजय कृष्ण मिश्रा तथा अन्य पदाधिकारियों ने शहडोल सांसद हिमाद्रि सिंह से भी मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। सांसद हिमाद्रि सिंह ने बताया कि इस विषय में पहले भी ज्ञापन प्राप्त हुआ था और उसे दिल्ली भेजा जा चुका है। उन्होंने पुनः मामले को केंद्र सरकार तक पहुंचाने तथा संबंधित अधिकारियों से चर्चा करने का आश्वासन दिया।
शासकीय शिक्षक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राकेश दुबे ने कहा कि जब वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों की भर्ती के समय TET जैसी कोई व्यवस्था लागू नहीं थी, तब वर्षों बाद इसे अनिवार्य करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि संगठन शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है और आगे भी करता रहेगा।
संगठन ने उम्मीद जताई है कि संसद के आगामी मानसून सत्र में आवश्यक विधायी संशोधन या अध्यादेश के माध्यम से देशभर के लाखों शिक्षकों को TET परीक्षा से राहत मिल सकती है। इस अवसर पर संगठन के अनेक पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।
