VACL Fraud Case : दोगुना मुनाफा का सपना दिखाकर करोड़ों की ठगी, VACL सोसायटी पर EOW की बड़ी FIR…

Rathore Ramshay Mardan
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भोपाल में निवेश के नाम पर बड़े आर्थिक घोटाले का मामला सामने आया है। वीएसीएल (VACL) जन सहयोग क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के अध्यक्ष सहित कई पदाधिकारियों के खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने धोखाधड़ी और गबन का मामला दर्ज किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि संस्था ने फिक्स डिपॉजिट, मासिक बचत और अन्य आकर्षक योजनाओं के जरिए हजारों लोगों से करोड़ों रुपये जमा कराए, लेकिन समय पूरा होने के बाद निवेशकों को उनकी राशि वापस नहीं की गई।

 

शिकायतकर्ता अशोक कुमार टाटा द्वारा भ्रष्टाचार निवारण युवा मंच के माध्यम से की गई शिकायत पर जांच शुरू हुई। EOW जांच में पाया गया कि संस्था के पदाधिकारियों ने निवेशकों को 12 प्रतिशत या उससे अधिक ब्याज, पांच वर्ष में राशि दोगुनी-तिगुनी होने और रोजगार उपलब्ध कराने जैसे लालच देकर बड़ी संख्या में लोगों से निवेश कराया।

 

मामले में तत्कालीन अध्यक्ष राकेश कुमार शर्मा, उपाध्यक्ष बी.एस. चौहान, अभिषेक शर्मा सहित कई संचालकों और सहयोगियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 409, 120-बी तथा मप्र निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2000 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

 

जांच में यह भी सामने आया कि संस्था का पंजीयन वर्ष 2013 में मप्र सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 के तहत किया गया था। संस्था का कार्यालय भोपाल के अरेरा कॉलोनी क्षेत्र में संचालित था। निवेशकों को “जन सहयोग कैश क्रेडिट सर्टिफिकेट” जारी किए जाते थे, जिनमें जमा राशि, ब्याज दर और भुगतान अवधि का उल्लेख रहता था।

 

EOW को बैंक ऑफ बड़ौदा की हबीबगंज शाखा से संस्था के खाते का रिकॉर्ड मिला, जिसमें करीब 1 करोड़ 64 लाख 64 हजार 504 रुपये का लेनदेन सामने आया। जांच में पाया गया कि खाते का संचालन मुख्य रूप से संस्था के अध्यक्ष द्वारा किया जा रहा था।

 

पीड़ित निवेशकों ने जांच में बताया कि समयावधि पूरी होने के बाद जब उन्होंने अपनी जमा राशि वापस मांगी तो पहले उन्हें आश्वासन दिया गया, लेकिन बाद में संस्था का कार्यालय बंद मिलने लगा और पदाधिकारी मोबाइल फोन बंद कर फरार हो गए। जांच के दौरान लगभग 40 निवेशकों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए हैं।

 

जांच एजेंसियों के अनुसार संस्था ने करीब 3000 निवेशकों से विभिन्न योजनाओं के माध्यम से राशि जमा कराई थी। कई कर्मचारियों ने यह भी बताया कि उन्हें वेतन तक नहीं मिला। कुछ निवेशकों द्वारा दिए गए चेक भी बाउंस होने की बात सामने आई है। EOW अब मामले में आर्थिक लेनदेन, निवेश राशि और अन्य आरोपियों की भूमिका की विस्तृत जांच कर रही है।

 

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