Social Worker : मां और अजन्मे शिशु की जिंदगी बचाने देवदूत बनकर पहुंचे पीतांबर पाराशर, 14वीं बार रक्तदान कर पेश की मानवता की मिसाल…

Rathore Ramshay Mardan
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परिजन हार चुके थे उम्मीद, तभी मदद के लिए आगे आए समाजसेवी; मां और अजन्मे बच्चे को मिला जीवनदान

 

डिण्डौरी। जब एक गर्भवती महिला जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही थी और उसके परिजन रक्त की तलाश में दर-दर भटक रहे थे, तब युवा समाजसेवी पीतांबर पाराशर किसी फरिश्ते की तरह सामने आए। जिला चिकित्सालय डिण्डौरी में भर्ती महिला को तत्काल रक्त की आवश्यकता थी, लेकिन काफी प्रयासों के बाद भी रक्त की व्यवस्था नहीं हो पा रही थी। ऐसे संकट के समय पीतांबर पाराशर ने बिना एक पल गंवाए अस्पताल पहुंचकर रक्तदान किया और मां के साथ उसके गर्भ में पल रहे शिशु की जिंदगी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

यह पहला अवसर नहीं था जब उन्होंने किसी जरूरतमंद के लिए अपना रक्त दिया हो। मानव सेवा को अपना संकल्प बना चुके पीतांबर पाराशर ने 14वीं बार स्वैच्छिक रक्तदान कर यह साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है। उनके रक्तदान से महिला का उपचार समय पर शुरू हो सका और परिजनों की आंखों में लौट आई उम्मीद की चमक।

 

महिला के परिजनों ने भावुक होकर कहा कि जब सभी रास्ते बंद नजर आ रहे थे, तब पीतांबर पाराशर हमारे लिए भगवान का भेजा हुआ दूत बनकर आए। उनकी इस मदद को हम जीवनभर नहीं भूल पाएंगे। पीतांबर पाराशर का कहना है कि रक्तदान केवल रक्त देना नहीं, बल्कि किसी के जीवन में नई उम्मीद और खुशियां लौटाना है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे भी आगे आकर नियमित रक्तदान करें, क्योंकि किसी का थोड़ा सा सहयोग किसी परिवार की दुनिया बचा सकता है।

 

आज जब समाज में स्वार्थ की बातें अधिक सुनाई देती हैं, ऐसे समय में पीतांबर पाराशर का यह निस्वार्थ सेवा भाव लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है। उनका यह 14वां रक्तदान केवल एक महिला के लिए जीवनदान नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण है।

 

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