ग्राम पंचायतों को मिलने वाली शासकीय राशि ग्रामीण विकास की रीढ़ होती है। जब वही राशि नशे जैसी गतिविधियों पर खर्च हो, तो यह न केवल भ्रष्टाचार का संकेत है, बल्कि जनविश्वास का भी हनन है। बीड़ी-माचिस पर खर्च हुई पंचायत निधि यह सवाल उठाती है कि निगरानी तंत्र कितना कमजोर है।
वहीं अब मामले में डिंडौरी जिला प्रशासन ने सख्त रूख आया है। जनपद पंचायत समनापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत अण्डई के सचिव प्रेम सिंह मरकाम को शासकीय राशि से बीड़ी व माचिस की खरीद पर निलंबित कर दिया गया है। आदेश में उल्लेख किया गया है कि प्रकाशित खबर “12 लड़ड़ मंगवाए, एक 120 रुपए का, किसने खाया और कहाँ – किसी को पता नहीं” के बाद की गई जांच में यह सामने आया कि सचिव प्रेम सिंह मरकाम ने ₹3780/- की राशि बीड़ी और माचिस जैसी नशीली सामग्री पर खर्च की। यह कार्य न केवल शासकीय राशि का दुरुपयोग है, बल्कि शासन के निर्देशों के विरुद्ध जाकर नशे को बढ़ावा देने वाला कृत्य भी है।
जांच प्रतिवेदन में उनके कृत्य को मध्यप्रदेश पंचायत सेवा नियम 2011 के नियम 7 (अनुशासन और नियंत्रण) का उल्लंघन मानते हुए कदाचार और अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखा गया है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत समनापुर द्वारा प्रस्तुत अनुशासनात्मक प्रस्ताव के आधार पर, जिला पंचायत डिंडौरी ने प्रेम सिंह मरकाम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा तथा उनका मुख्यालय जनपद पंचायत समनापुर रहेगा।
