बालाघाट। भारत सरकार द्वारा मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी दिशा में मध्यप्रदेश शासन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में बालाघाट पुलिस नक्सल विरोधी अभियान को बेहद प्रभावी, तेज और सख्ती के साथ संचालित कर रही है। जिले के नक्सल प्रभावित इलाकों में हॉकफोर्स, सीआरपीएफ, कोबरा, जिला पुलिस और बीडीडीएस टीम की संयुक्त टुकड़ियाँ लगातार जंगल क्षेत्रों में सघन तलाशी अभियान चला रही हैं।
पिछले कई दिनों से जारी इस संयुक्त अभियान में सुरक्षा बल न केवल नक्सलियों की तलाश कर रहे हैं, बल्कि डॉग स्क्वॉड और बीडीडीएस टीम की सहायता से जंगल में गाड़कर छिपाए गए नक्सली डम्प, विस्फोटक, हथियार, संचार उपकरण और दैनिक उपयोग की सामग्री को भी ढूंढकर जब्त कर रहे हैं। इसी क्रम में थाना किरनापुर के सिरका–मोजाडेरा तथा अलीटोला जंगलों में दो अलग-अलग स्थानों पर भूमिगत तरीके से छिपाए गए भारी मात्रा में नक्सली डम्प का खुलासा हुआ है।
सिरका–मोजाडेरा क्षेत्र से बरामद सामग्री में विस्फोटक पदार्थ, कारतूस, इंजेक्शन, विटामिन सप्लीमेंट, दवाइयाँ, चावल, प्लास्टिक ड्रम और नक्सली साहित्य जैसी वस्तुएँ शामिल हैं। वहीं अलीटोला जंगल से हस्तलिखित चिट्ठियाँ, विस्फोटक सेल, लांचर राउंड, .303 और 12 बोर राउंड, वायरलेस सेट, रेडियो, एंड्रॉयड और कीपैड मोबाइल, पेनड्राइव, हार्ड डिस्क, मेमोरी कार्ड, मेडिकल किट, टॉर्च और अनाज सहित कई सामग्रियाँ बरामद की गई हैं।
संयुक्त अभियान PR48 के अनुसार लगातार की जा रही इस तलाशी कार्रवाई ने नक्सलियों पर भारी दबाव बनाया है, जिससे वे अपने ठिकानों को छोड़कर भागने को मजबूर हो रहे हैं। बालाघाट सहित पड़ोसी राज्यों की संयुक्त कार्रवाई से हाल ही में एमएमसी जोन के कई नक्सलियों ने आत्मसमर्पण भी किया है, जिससे यह स्पष्ट है कि सुरक्षा बलों की रणनीति नक्सलियों को कमजोर करती जा रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नक्सलियों के पास अब केवल दो विकल्प हैं—या तो आत्मसमर्पण करें या सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहें। इसी संकल्प के साथ बालाघाट पुलिस जिले को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में लगातार और कड़ी कार्रवाई जारी रखे हुए है, जिसके परिणाम धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं।




