— दिल्ली के आरोपी समेत अन्य के खिलाफ EOW ने दर्ज की FIR, व्यापारी की जानकारी के बिना बदला पासवर्ड और फर्जी रिटर्न भी किया फाइल
भोपाल। मध्यप्रदेश में जीएसटी खाते में सेंध लगाकर करोड़ों रुपये के फर्जी इनवॉइस अपलोड करने और टैक्स चोरी की कोशिश का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच में भोपाल के एक व्यापारी के GST खाते का कथित रूप से अनधिकृत इस्तेमाल कर 8 करोड़ 9 लाख 81 हजार 305 रुपये मूल्य के 989 फर्जी इनवॉइस अपलोड किए जाने का खुलासा हुआ है। इन इनवॉइस के माध्यम से करीब 1.46 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी का प्रयास किए जाने का आरोप है। मामले में EOW ने दिल्ली निवासी बसंत कुमार श्रीवास्तव उर्फ बसंत कुमार गौर एवं अन्य के खिलाफ FIR दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
— ये रहा पूरा मामला
दरअसल EOW के अनुसार, व्यापारी की जानकारी के बिना उसके GST खाते का पासवर्ड बदल दिया गया। इसके बाद खाते में दो अन्य ई-मेल आईडी और एक नया मोबाइल नंबर जोड़कर फरवरी 2026 का GSTR-1 रिटर्न भी फाइल कर दिया गया। व्यापारी को जब अपने खाते में लॉगिन करने में परेशानी हुई और उसने GST विभाग की मदद से खाता दोबारा खुलवाया, तब करोड़ों रुपये के ऐसे इनवॉइस सामने आए, जिनका उसके कारोबार से कोई संबंध नहीं था।
पासवर्ड बदला, व्यापारी को खाते से किया बाहर
शिकायतकर्ता भोपाल में प्रोपराइटरशिप फर्म संचालित करते हैं, जिसका GST पंजीयन 19 जून 2025 को हुआ था। शिकायत के मुताबिक, 21 फरवरी 2026 को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर GST पोर्टल से पासवर्ड बदलने और रिटर्न फाइलिंग से संबंधित चार SMS प्राप्त हुए। व्यापारी का कहना है कि उसने उस दिन न तो पासवर्ड बदला और न ही कोई रिटर्न दाखिल किया।
24 फरवरी को जब उसने अपने GST खाते में लॉगिन करने का प्रयास किया, तो पोर्टल पर ‘Invalid Username or Password’ का संदेश दिखाई दिया। वह E-Way Bill पोर्टल पर भी अपने खाते में प्रवेश नहीं कर सका। इसके बाद 27 फरवरी 2026 को उसने GST Grievance Portal पर ऑनलाइन शिकायत की और GST कार्यालय भोपाल पहुंचकर अपनी लॉगिन आईडी तथा पासवर्ड दोबारा अपडेट कराया। खाते तक पहुंच बहाल होने पर उसे पता चला कि उसके नाम से फरवरी का GSTR-1 रिटर्न पहले ही दाखिल किया जा चुका था और उसमें 989 इनवॉइस दर्ज थे।
सात फर्मों के नाम पर अपलोड किए गए फर्जी बिल
जांच में सामने आया कि इनवॉइस सात फर्मों के नाम पर दर्शाए गए थे, जो राजगढ़ जिले और भोपाल से संबंधित हैं। शिकायतकर्ता ने इन फर्मों के साथ किसी प्रकार का कारोबार होने से इनकार किया है। जांच के अनुसार, संबंधित इनवॉइस शिकायतकर्ता की फर्म ने जारी नहीं किए थे और उनका वास्तविक व्यवसाय से कोई संबंध नहीं था। इस तरह उसके GSTIN का कथित रूप से फर्जी बिलिंग के लिए इस्तेमाल किया गया।
मामले की जांच के दौरान EOW ने केंद्रीय GST, राज्य कर विभाग और GST खुफिया महानिदेशालय (DGGI) से दस्तावेज एवं जानकारी जुटाई। इनवॉइस में दर्शाई गई फर्मों को भी पत्र भेजे गए। ई-मेल आईडी से संबंधित जानकारी Google India से तथा मोबाइल नंबरों के ग्राहक विवरण संबंधित दूरसंचार कंपनियों से प्राप्त किए गए। शिकायतकर्ता के अलावा दो अन्य व्यापारियों के बयान भी दर्ज किए गए।
ई-मेल और मोबाइल नंबर से आरोपी तक पहुंची जांच
EOW की जांच के मुताबिक, व्यापारी के GST खाते में उसकी जानकारी के बिना जोड़ी गई ई-मेल आईडी में से एक का इस्तेमाल आरोपी बसंत कुमार श्रीवास्तव की फर्म सिद्धि इंटरप्राइजेस के GST पंजीयन में भी किया गया था। जांच में सामने आया कि उक्त ई-मेल से जुड़े दो मोबाइल नंबरों में से एक आरोपी के नाम पर जारी था, जबकि दूसरा बिहार के एक व्यक्ति के नाम पर दर्ज था। जांच के अनुसार, दूसरे नंबर का इस्तेमाल भी आरोपी द्वारा किया जाना पाया गया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, व्यापारी के GST खाते में अनधिकृत लॉगिन और फर्जी इनवॉइस अपलोड करने में इसी ई-मेल आईडी का इस्तेमाल किया गया। इन तथ्यों के आधार पर आरोपी और कथित फर्जीवाड़े के बीच संबंध सामने आने की बात कही गई है।
राजगढ़ की फर्म में भी फर्जी क्रेडिट नोट का आरोप
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पर अन्य फर्मों के GST खातों में फर्जी क्रेडिट नोट अपलोड कर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का अनुचित लाभ लेने की गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। राजगढ़ जिले के पचोर स्थित एक फर्म के संचालक ने अपने बयान में बताया कि उसकी फर्म के खाते में भी सिद्धि इंटरप्राइजेस के नाम से इसी तरह के क्रेडिट नोट अपलोड किए गए थे।
ऐसे मामलों में फर्जी इनवॉइस के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किए जाने की आशंका रहती है, जबकि वास्तविक रूप से माल की आपूर्ति या टैक्स भुगतान नहीं हुआ होता। इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच सकता है। साथ ही, जिस व्यापारी के GSTIN का कथित रूप से दुरुपयोग किया जाता है, उसे भी अनावश्यक कर संबंधी कार्रवाई और देनदारी का सामना करना पड़ सकता है।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
EOW ने 13 अक्टूबर 2026 को बसंत कुमार श्रीवास्तव उर्फ बसंत कुमार गौर एवं अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61(2), 62 और 318(4), तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66-C और 66-D के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। मामले में विवेचना जारी है।
जांच एजेंसी अब फर्जी इनवॉइस से लाभ लेने वाली फर्मों और कथित फर्जीवाड़े में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल करेगी। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है और आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

