— गर्भवती महिला की मौत और वसूली प्रकरण पर कलेक्टर की रिपोर्ट के बाद आयुक्त की त्वरित कार्रवाई….
मध्यप्रदेश के बालाघाट जिला चिकित्सालय में पदस्थ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. गीता बारमाटे को गंभीर लापरवाही, अनुशासनहीनता और मरीजों से अवैध वसूली के आरोपों के चलते आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तरुण राठी ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह निर्णय कलेक्टर मृणाल मीना द्वारा भेजे गए अनुशासनात्मक प्रस्ताव पर लिया गया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं जबलपुर निर्धारित किया गया है।
प्रकरण के अनुसार 11 नवंबर को किरनापुर विकासखंड के ग्राम रट्टापायली की गर्भवती महिला किरण डोंगरे को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। उस समय आकस्मिक चिकित्सा और ऑपरेशन ड्यूटी पर तैनात डॉ. गीता बारमाटे ने न तो मरीज का परीक्षण किया और न ही आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया की। अगले दिन 12 नवंबर को जब डॉ. श्रद्धा बारमाटे द्वारा महिला का सिजेरियन ऑपरेशन किया गया, तब तक गर्भस्थ शिशु की मृत्यु हो चुकी थी। चिकित्सकीय आकलन में स्पष्ट हुआ कि यदि 11 नवंबर को ही परीक्षण कर तत्काल ऑपरेशन किया जाता तो शिशु की जान बचाई जा सकती थी।
जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि 5 नवंबर को बिरसा जनपद के कोडबीरकोना गांव की बैगा महिला रतनबाई मरकाम से डॉ. बारमाटे ने अपने स्टाफ के माध्यम से पांच हजार रुपये लिए थे। जब यह पता चला कि प्रसव में अभी एक माह का समय शेष है, तो यह राशि वापस कर दी गई। इससे पहले भी डॉ. बारमाटे के विरुद्ध प्रसव के नाम पर रुपये वसूली की शिकायतें मिल चुकी थीं।
लगातार कर्तव्य में लापरवाही, अनुशासनहीनता और शासकीय कार्यों के प्रति उदासीनता को गंभीर मानते हुए कलेक्टर मीना ने अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव भोपाल भेजा था। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए आयुक्त तरुण राठी ने तत्काल निलंबन आदेश जारी कर दिए। स्वास्थ्य विभाग में इस कार्रवाई को जवाबदेही और सख्ती का महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।




