मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले की ग्राम पंचायतों में सरकारी धन के उपयोग और मंत्रालय के दिशा निर्देशों की अनदेखी का मामला उजागर हुआ है। बता दें कि ग्राम पंचायत विक्रमपुर में पांचवे और 15वें वित्त के तहत आवंटित राशि का उपयोग बगैर कार्ययोजना और अन्य व्ययों के नाम पर बड़े पैमाने पर किया गया। सरपंच रामनारायण धुर्वे और तत्कालीन सचिव तीरथ गोसाईं ने वित्तीय वर्ष 2021-22 से लेकर 2024-25 तक लगभग तीन वर्षों में विभिन्न कर्मचारियों के मानदेय, प्रसाद वितरण, स्ट्रीट लाइट, सीसी रोड निर्माण, पेयजल परियोजनाओं और अन्य कार्यों के लिए लाखों रुपए का भुगतान नियम विरुद्ध किया।

मंत्रालय पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि फंड का उपयोग प्राथमिकता वाले कार्य जैसे स्वच्छता, पेयजल और पक्के निर्माण में किया जाए और सभी कार्य योजनाबद्ध तरीके से संपन्न हों। इसके अलावा जिला और जनपद पंचायत के अधिकारी फंड के उपयोग और गुणवत्ता पर नजर रखें। लेकिन विक्रमपुर पंचायत में इन नियमों की धज्जियां उड़ाई गई और जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने रहे। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल में दर्ज आंकड़ों के अनुसार 2021 में छह कार्य प्रस्तावित थे, जिनमें से केवल एक कार्य प्रारंभ हुआ। 2022 में 21 गतिविधियां प्रस्तावित की गई, लेकिन कोई कार्य प्रारंभ नहीं किया गया। 2023 में 63 प्रस्तावित गतिविधियों में केवल सात कार्य प्रारंभ किए गए, जबकि 2024 और 2025 में प्रस्तावित 121 गतिविधियों में कोई भी कार्य शुरू नहीं हुआ। इसके बावजूद सरपंच और सचिव ने अन्य व्यय के नाम पर लाखों रुपए का भुगतान किया।

विशेष रूप से 2024 में दिव्यांगों के लिए रैंप निर्माण की वर्क आईडी से पेंटर को 67,000 रुपए का भुगतान किया गया, जबकि नवीन वाटर सप्लाई योजना की वर्क आईडी से सोकपिट, नाली निर्माण और पेयजल परिवहन के नाम पर लाखों रुपए का भुगतान किया गया। इसी तरह प्लास्टिक वेस्ट स्टोरेज की वर्क आईडी से एसबीएम, नलजल, कर्मचारी मानदेय, प्रसाद वितरण और अन्य कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर भुगतान हुआ। सामुदायिक स्वच्छता परिसर की वर्क आईडी से सीसी रोड, सामग्री और पेयजल परियोजनाओं के नाम पर 1,50,000 रुपए से अधिक का भुगतान किया गया। इन सभी कार्यों का वर्क आईडी और फोटो जियो टैग नहीं बनाया गया।
15वें वित्त के तहत सरपंच और सचिव ने मानदेय, कार्यालय व्यय, टेंट, वाहन भाड़ा, मवेशी बाजार किराया, 15 अगस्त प्रसाद, चाय–नाश्ता सहित अन्य व्ययों के नाम पर लाखों रुपए का भुगतान किया, जबकि मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित कार्यों पर खर्च नहीं करने के निर्देश दिए थे। इन सभी अनियमितताओं से स्पष्ट है कि ग्राम पंचायत विक्रमपुर ने शासन की गाइडलाइन और प्राथमिकता के कार्यों की अनदेखी की और सरकारी धन का दुरुपयोग किया।




