डिंडौरी। एक मां की बेबसी और आंखों में छलकते आंसुओं ने आखिरकार प्रशासन का दिल पिघला दिया। मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में ग्राम नएगांव पड़रियाकला नेवसा की रहने वाली रूकमणी बाई अपने दो मासूम बच्चों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं। पति को खोने के बाद टूटी इस महिला ने अपनी दर्दभरी दास्तां सुनाई तो वहां मौजूद हर कोई भावुक हो उठा।
रूकमणी बाई ने बताया कि उनके पति राजेश विश्वकर्मा मजदूरी के लिए महाराष्ट्र गए थे, जहां एक हादसे में तालाब में डूबने से उनकी मौत हो गई। पति की असमय मौत के बाद घर का सहारा छिन गया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें संबल योजना का लाभ नहीं मिल पाया। अब हालत यह है कि दो छोटे बच्चों के साथ जीवन यापन करना भी मुश्किल हो गया है।
महिला ने कांपती आवाज में बताया कि उनकी 3 साल की बेटी खुश्बू और 6 साल का दिव्यांग बेटा है। घर में कोई कमाने वाला नहीं है, जिससे बच्चों के पेट भरना और उनका भविष्य संवारना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस मार्मिक स्थिति को देखते हुए कलेक्टर ने तुरंत संवेदनशीलता दिखाते हुए राहत के निर्देश दिए। महिला एवं बाल विकास विभाग को बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना के तहत हर महीने 4 हजार रुपये देने के निर्देश दिए गए। वहीं दिव्यांग बेटे का प्रमाण पत्र बनवाकर उसे पेंशन योजना से जोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू कराई गई।
कलेक्टर ने रूकमणी बाई को तत्काल राहत देते हुए रोगी कल्याण मद से 20 हजार रुपये का चेक सौंपा। उन्होंने महिला को भरोसा दिलाया कि यह राशि बच्चों की देखभाल और पढ़ाई में काम आएगी। साथ ही बच्चों को आंगनवाड़ी और स्कूल भेजने की भी समझाइश दी।
इतना ही नहीं, कलेक्टर ने महिला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वरोजगार योजना के तहत दुकान या छोटा व्यवसाय शुरू करने हेतु आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन भी दिया। अंत में उन्होंने अपना मोबाइल नंबर देते हुए कहा कि किसी भी परेशानी में सीधे संपर्क करें, प्रशासन हर संभव मदद के लिए तैयार है। जनसुनवाई में एक मां की पीड़ा ने जहां सभी को भावुक कर दिया, वहीं प्रशासन की तत्परता ने यह साबित कर दिया कि समय पर संवेदनशील पहल किसी की जिंदगी में नई उम्मीद जगा सकती है।
