मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में लावारिस हालत में मिली 2 वर्षीय मासूम बालिका के मामले ने एक बड़े मानव तस्करी रैकेट का पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त से जुड़ा एक संगठित गिरोह सक्रिय था। इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक महिला आरोपी अभी भी फरार है और उसकी तलाश जारी है।

दरअसल पुलिस जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि वर्ष 2024 में जन्म के कुछ ही दिनों बाद बालिका को उसकी मां से अलग कर इंदौर ले जाया गया था, जहां उसे करीब एक लाख रुपये में एक दंपती को सौंप दिया गया। कुछ समय बाद वही दंपती बच्ची को श्योपुर क्षेत्र में लावारिस हालत में छोड़कर फरार हो गया, जिसके बाद स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस ने बालिका को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तकनीकी और जमीनी स्तर पर व्यापक जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, मोबाइल कॉल डिटेल और लोकेशन का विश्लेषण किया गया, साथ ही बैंक ट्रांजैक्शन की जांच कर आरोपियों तक पहुंच बनाई गई। अलग-अलग जिलों के बीच समन्वय स्थापित कर पुलिस ने गिरोह के सदस्यों की पहचान करते हुए एक-एक कर गिरफ्तारी सुनिश्चित की।
फिलहाल बालिका की वास्तविक पहचान स्थापित करने के लिए डीएनए परीक्षण कराया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद बच्ची की जैविक मां और पूरे घटनाक्रम के अन्य पहलुओं पर और स्पष्टता आने की उम्मीद है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मानव तस्करी जैसे जघन्य अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की भी जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।
यह घटना समाज के सामने एक गंभीर सवाल खड़ा करती है कि आखिर मासूम बच्चों की खरीद-फरोख्त का यह अमानवीय धंधा कब तक जारी रहेगा। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी इस प्रकार की संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दें तो तत्काल सूचना दें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर ऐसे अपराधों पर रोक लगाई जा सके।
