मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले के करंजिया जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत सेनगुड़ा में निर्माण कार्यों में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ को लिखित शिकायत सौंपते हुए उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत में पांचवें वित्त की राशि और सांसद निधि से स्वीकृत निर्माण कार्यों में सरपंच और सचिव ने उपयंत्री एवं सहायक यंत्री से मिलीभगत कर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की है। शिकायत के अनुसार सांसद निधि से स्वीकृत 25 लाख रुपये की लागत से बड़े टोला में सामुदायिक भवन का निर्माण कराया जा रहा है, जिसमें मानक विहीन रेत और गिट्टी घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है, जबकि बिलों में उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री का भुगतान दिखाया गया है। इस तरह विकास की राशि का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार किया जा रहा है।

इसी प्रकार ग्राम पंचायत में हाल ही में 5 लाख 75 हजार रुपये की लागत से बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि इसमें भी मानकों की अनदेखी कर जर्जर मकानों से निकाली ईंटें और मिट्टी मिली रेत का उपयोग किया गया। नतीजतन, कुछ ही महीनों में दीवारों में बड़ी दरारें पड़ गईं और वॉल की स्थिति इतनी खराब हो गई कि वह गिरने की कगार पर पहुंच गई है। ग्रामीणों ने सरपंच देव सिंह नेटी और सचिव शंकर लाल मार्को पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि निर्माण कार्यों के दौरान जब उन्होंने विरोध जताया तो उन्हें मारपीट की धमकी दी गई। इतना ही नहीं, शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि सरपंच के द्वारा मनमानी पूर्वक सचिव के बिना हस्ताक्षर कराए ही लाखों रुपये के बिलों का भुगतान किया जा रहा है और पंचायत के सभी कार्यों का भुगतान अपने चहते सप्लायर “दीपक ट्रेडर्स” नामक फर्म को किया जा रहा है, जबकि गांव में इस नाम की बिल में दर्शाए गए पता में कोई सामग्री दुकान मौजूद ही नहीं है। इससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि भुगतान सिर्फ कागजों में दिखाकर राशि का गबन किया जा रहा है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि पंचायत में हुए निर्माण कार्यों की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और सरपंच और सचिव के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके। अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन कोई कार्रवाई करता है या फिर कार्रवाई खानापूर्ति तक ही सीमित रहेगी। खैर यह सब आने वाले कुछ दिनों में तय हो जाएगा। बरहाल ग्रामीणों का कहना है कि कलेक्टर के द्वारा जांच कर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया है।





