भोपाल। जिस शिक्षक के कंधों पर परीक्षा की निष्पक्षता और बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी थी, उसी के हाथों भरोसा टूट गया। कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान नकल कराने के गंभीर मामले ने न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि समाज के उस विश्वास को भी झकझोर दिया है, जो शिक्षक को मार्गदर्शक मानता है।
दरअसल माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित बोर्ड परीक्षा के अंतर्गत नजीराबाद स्थित अशासकीय चित्रांश हायर सेकेंड्री स्कूल को परीक्षा केंद्र बनाया गया था। 13 फरवरी 2026 को परीक्षा के दौरान जिला स्तर पर गठित उड़नदस्ते ने जब कक्ष क्रमांक 17 का निरीक्षण किया, तो वहां का दृश्य चौंकाने वाला था। परीक्षा कक्ष में तैनात पर्यवेक्षक शिक्षक गुलाब सिंह मीना के पास नकल की पर्चियां पाई गईं और उसी कक्ष में दो परीक्षार्थियों को नकल करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।
यह वही कक्ष था, जहां विद्यार्थियों का भविष्य तय होना था और वही वह स्थान बन गया, जहां नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। पकड़े गए दोनों परीक्षार्थियों के विरुद्ध नकल प्रकरण दर्ज किए गए हैं, लेकिन सवाल उस शिक्षक की भूमिका पर उठ रहे हैं, जिसे अनुशासन और ईमानदारी का प्रहरी होना था।
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय भोपाल के अनुसार पर्यवेक्षक शिक्षक ने परीक्षा आयोजन संबंधी निर्देशों की अवहेलना करते हुए शिक्षक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। यह कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 का स्पष्ट उल्लंघन माना गया है और इसे कदाचरण की श्रेणी में रखा गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी एन.के. अहिरवार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गुलाब सिंह मीना को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बैरसिया नियत किया गया है। नियमानुसार उन्हें निलंबन भत्ते की पात्रता होगी।
इस कार्रवाई की सूचना माध्यमिक शिक्षा मंडल, आयुक्त लोक शिक्षण, कलेक्टर भोपाल सहित सभी संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई है। शिक्षा विभाग की इस सख्ती को परीक्षा की पवित्रता बनाए रखने का प्रयास माना जा रहा है, लेकिन यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि जब जिम्मेदार ही लापरवाह बन जाएं, तो बच्चों का भविष्य किसके भरोसे छोड़ा जाए।
