— मनरेगा में फुल एक्शन: अधूरे कामों पर सरकार का डंडा, जवाबदेही तय
भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने महात्मा गांधी नरेगा के तहत प्रदेशभर में चल रहे लाखों कार्यों को समय-सीमा में पूरा करने के लिए सख्त एडवायजरी जारी की है। भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्देशों के आधार पर जारी आदेश में बताया गया है कि प्रदेश में 9.73 लाख से अधिक कार्य अभी प्रगतिरत हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से पूरा करना अनिवार्य किया गया है।
शासन ने कार्यों को तीन श्रेणियों में बांटते हुए अलग-अलग डेडलाइन तय की है। पहली श्रेणी के कार्य जैसे वर्मी कम्पोस्ट, रिचार्ज पिट, शौचालय, नाला सुधार और छोटे निर्माण कार्य 31 मार्च 2026 तक पूरे करने होंगे। दूसरी श्रेणी के कार्य जैसे सीसी रोड, नाली, पशु शेड, खेल मैदान और जल संरक्षण संरचनाएं 30 अप्रैल 2026 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं तीसरी श्रेणी के बड़े कार्य जैसे ग्रामीण आवास, तालाब, आंगनवाड़ी, पंचायत भवन और चेकडैम 30 जून 2026 तक पूरे किए जाएंगे।
निर्देशों में साफ कहा गया है कि जिन कार्यों में शून्य या कम खर्च हुआ है, उनका भौतिक सत्यापन कर उपयोगिता के आधार पर ही उन्हें जारी या बंद किया जाएगा। 30 प्रतिशत से अधिक खर्च वाले सभी कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करना होगा। यदि कोई कार्य अव्यवहारिक या अनुपयोगी पाया जाता है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ वसूली और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। हर कार्य के लिए 100 प्रतिशत फील्ड निरीक्षण, जियो टैगिंग, फोटो अपलोड और ग्रामसभा की स्वीकृति अनिवार्य की गई है। बिना दस्तावेजी प्रमाण के किसी भी कार्य को “Complete” या “Closed” नहीं किया जा सकेगा।
— जिलों में लाखों कार्य लंबित
जारी परिशिष्ट के अनुसार कई जिलों में बड़ी संख्या में कार्य लंबित हैं। डिंडौरी जिले में कुल 11,791 कार्य पहली श्रेणी, 1,295 दूसरी श्रेणी और 2,568 तीसरी श्रेणी में 7,928 तहत प्रगतिरत हैं। इसी तरह धार, बालाघाट, छिंदवाड़ा, रीवा, सतना और खंडवा जैसे जिलों में भी हजारों की संख्या में कार्य लंबित हैं, जिन्हें तय समय सीमा में पूरा करना चुनौती बना हुआ है।
— जिला स्तर पर बनेगी समिति
कार्य पूर्णता और समीक्षा के लिए हर जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति गठित की गई है। यह समिति कार्यों का निरीक्षण, सत्यापन और अंतिम निर्णय करेगी। साथ ही कम से कम 10% कार्यों का फील्ड निरीक्षण अनिवार्य किया गया है।
— लापरवाही पर सख्त कार्रवाई
शासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि कार्यों में देरी, कुप्रबंधन, राशि के दुरुपयोग या अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों से वसूली के साथ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सामाजिक अंकेक्षण के जरिए भी निगरानी बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा पुराने लंबित बिल, मस्टर रोल और अपूर्ण भुगतान प्रविष्टियों को भी हटाने के निर्देश दिए गए हैं। प्लानर सॉफ्टवेयर के माध्यम से कार्यों की मॉनिटरिंग कर मासिक प्रगति की समीक्षा की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि मनरेगा के तहत सभी कार्य समय पर पूरे हों और ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण सुनिश्चित हो सके। देखें पूरी लिस्ट…

