Mp Court Decision : हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति वैध, ई-अटेंडेंस अब प्रदेशभर में अनिवार्य….

Rathore Ramshay Mardan
4 Min Read

भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षकों की उपस्थिति अब ई-अटेंडेंस के माध्यम से ही दर्ज होगी। इस प्रणाली को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इंदौर खंडपीठ ने साफ कहा है कि उपस्थिति दर्ज करना शिक्षकों का कर्तव्य है और सरकार को यह सुनिश्चित करने का पूरा अधिकार है। अदालत ने कहा कि यदि शिक्षक समय पर विद्यालय आते-जाते हैं, तो ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने में किसी प्रकार की हिचक या परेशानी का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इसमें न तो किसी वैधानिक प्रावधान का उल्लंघन है और न ही किसी संवैधानिक अधिकार का हनन होता है, इसलिए याचिकाओं में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।

विभाग ने हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत जवाब में कहा कि ई-अटेंडेंस प्रणाली MPTAASC परियोजना के तहत e-HRMS मॉड्यूल में विकसित की गई है, जो पूर्णत: तकनीक आधारित, सटीक, पारदर्शी और न्यूनतम मानवीय दखल वाली व्यवस्था है। दूरस्थ जनजातीय अंचलों में भी नेटवर्क की स्थिति 2025 तक 2023 की तुलना में काफी बेहतर हो चुकी है। जहाँ नेटवर्क उपलब्ध नहीं है, वहाँ Offline Capture + Later Sync और Deviation Register की सुविधा दी गई है, ताकि किसी शिक्षक को उपस्थिति दर्ज कराने में समस्या न हो।

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि ई-अटेंडेंस ऐप और e-HRMS पोर्टल IT Act 2000 के तहत सुरक्षित संरचना पर आधारित हैं और अब तक न तो हैकिंग और न ही किसी तरह की डेटा बीच की एक भी घटना सामने आई है। यह प्रणाली MPSEDC जैसी शासकीय तकनीकी एजेंसी द्वारा विकसित की गई है और डेटा सुरक्षा संबंधी सभी वैधानिक प्रावधानों का कड़ाई से पालन करती है। विभाग का कहना है कि गोपनीयता या आधार डेटा के दुरुपयोग के आरोप पूरी तरह आधारहीन हैं क्योंकि याचिकाकर्ताओं द्वारा कोई भी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।

विभाग ने यह भी बताया कि ई-अटेंडेंस लागू करने से पहले विस्तृत स्तर पर प्रशिक्षण, डेमो, SOP और दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। राज्य, संभाग और जिला स्तर पर परियोजना समन्वयकों को भी नियुक्त किया गया, जिन्होंने क्रमश: शिक्षकों और संस्थाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया। इसलिए यह कहना गलत है कि प्रणाली बिना चर्चा या तैयारी के लागू की गई।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह टिप्पणी भी दर्ज की कि राज्य का इस व्यवस्था में स्पष्ट रूप से हित जुड़ा हुआ है। विशेषकर उन प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में, जो दूरस्थ इलाकों में स्थित हैं और जहाँ लंबे समय से शिक्षकों की अनियमित उपस्थिति की शिकायतें मिलती रही हैं, वहाँ इस व्यवस्था का सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा। अदालत ने कहा कि यह प्रणाली समाज के कमजोर वर्गों और आम जनता के हित में है।

ई-अटेंडेंस को लेकर उठ रहे सवालों पर विभाग का रुख स्पष्ट है कि यह प्रणाली शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। न्यायालयीय समर्थन मिल जाने के बाद अब यह व्यवस्था प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थानों में अनिवार्य रूप से जारी रहेगी।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *