बालाघाट। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाघाट जिले में महिला नक्सली के आत्मसमर्पण पर मध्यप्रदेश पुलिस को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नक्सली गतिविधियों पर नियंत्रण की दिशा में यह बड़ी सफलता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह आत्मसमर्पण मध्यप्रदेश की प्रभावी आत्मसमर्पण, पुनर्वास सह राहत नीति 2023 के अंतर्गत हुआ है।
1 नवम्बर को थाना लांजी के अंतर्गत चौरिया कैम्प में महिला नक्सली सुनीता पिता बिसरू ओयाम, निवासी गोमवेटा, जिला बीजापुर (छत्तीसगढ़) ने शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और भारत के संविधान पर विश्वास जताते हुए आत्मसमर्पण किया। सुनीता ने अपने हथियार — INSAS रायफल, तीन मैगजीन, 30 जिंदा राउंड और UBGL शेल — के साथ जिला पुलिस बालाघाट के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश आगामी वर्ष तक नक्सल नियंत्रण का लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में सजग है। उन्होंने कहा कि नक्सल विरोधी अभियान लगातार जारी रहेगा और छत्तीसगढ़ व महाराष्ट्र की सीमावर्ती नक्सली गतिविधियों को भी प्रदेश में पूरी तरह नियंत्रित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 10 महीनों में लगभग 1.46 करोड़ रुपये के इनामी नक्सलियों को निष्क्रिय किया गया है, जो मध्यप्रदेश पुलिस की दक्षता और संकल्प का प्रमाण है। साथ ही, पुलिस आउटरीच प्रोग्राम के सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। राज्य सरकार ने “सॉफ्ट टच अप्रोच” के अंतर्गत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए रास्ते खोले हैं, ताकि वे मुख्यधारा में लौट सकें।
सूत्रों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाली सुनीता मलाजखंड दर्रेकसा दलम में एरिया कमेटी मेंबर (ACM) के रूप में सक्रिय थी और मध्यप्रदेश, गोंदिया एवं राजनांदगांव (GRB) डिवीजन में नक्सली गतिविधियों में संलिप्त थी। वह वर्ष 2022 में माओवादी संगठन में शामिल हुई थी और छत्तीसगढ़ के माड क्षेत्र में 6 माह का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सीसी सदस्य रामदेर की गार्ड के रूप में कार्यरत रही।





