मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में महात्मा गांधी नरेगा से निर्मित गौशालाओं में गौवंश की समुचित देखरेख सुनिश्चित करने हेतु कलेक्टर नेहा मारव्या ने समय-सीमा बैठक में समीक्षा की। उन्होंने सभी मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत, नगर पंचायत अधिकारी और पशुपालन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि निराश्रित गौवंश को चिन्हित कर शीघ्र गौशालाओं तक पहुंचाया जाए।
कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि जिले की सड़कों पर कोई भी निराश्रित गौवंश नहीं दिखना चाहिए। इसके लिए शासन द्वारा गौशालाओं और चारा-भूसा की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। सभी सीईओ जनपद पंचायतों को निर्देशित किया गया है कि वे आजीविका मिशन के ब्लॉक प्रबंधकों के साथ मिलकर गौशालाओं का निरीक्षण करें और स्व-सहायता समूहों को सक्रिय बनाएं।
जिले के सभी विकासखंडों में सौ-सौ पशुओं की क्षमता वाली गौशालाएं निर्मित हैं। अमरपुर के किसलपुरी, बजाग के करोपानी, डिंडौरी के रूसामाल, करंजिया के मौहत्तरा, मेंहदवानी के डोकरघाट, समनापुर के मुकुटपुर और शहपुरा के केंहेजरा में वर्ष 2019-20 में गौशाला एवं चारागाह का निर्माण किया गया था।
पशुपालन विभाग और गौसंवर्धन बोर्ड द्वारा प्रत्येक गौशाला में सौ पशु होने पर प्रति पशु 40 रुपए के मान से चारा-भूसा सहायता उपलब्ध कराई जाती है। वहीं, एनआरएलएम से जुड़े स्व-सहायता समूह की महिलाओं को मनरेगा के माध्यम से गौवंश की देखरेख करने पर मजदूरी भी दी जाती है।
