— एक हेक्टेयर में 45 से 50 क्विंटल धान उत्पादन का दावा, पंजीयन सीमा कम होने से किसानों को उपज बिचौलियों के हाथों बेचने की मजबूरी
डिंडौरी। जिले में धान खरीदी व्यवस्था को लेकर किसानों की परेशानियां एक बार फिर सामने आई हैं। किसानों ने शासन-प्रशासन से धान खरीदी की पंजीयन सीमा बढ़ाने के साथ बंद पड़े खरीदी केंद्रों को दोबारा शुरू करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि वर्तमान में एक हेक्टेयर भूमि पर महज 23 क्विंटल धान खरीदी का पंजीयन किया जा रहा है, जबकि वास्तविक उत्पादन 45 से 50 क्विंटल तक हो रहा है। ऐसे में शेष उपज बेचने के लिए किसानों को परेशान होना पड़ता है और कई बार बिचौलियों के हाथों कम कीमत पर धान बेचना पड़ता है।
किसानों ने मांग की है कि डिंडौरी जिले में प्रति हेक्टेयर धान खरीदी का पंजीयन बढ़ाकर 45 क्विंटल किया जाए, ताकि किसानों को उनकी वास्तविक उपज का उचित मूल्य मिल सके। किसानों ने अपने आवेदन में मंडला और सिवनी जिले का उदाहरण देते हुए बताया है कि वहां एक हेक्टेयर भूमि पर 42 क्विंटल तक धान खरीदी का पंजीयन किया जाता है। ऐसे में डिंडौरी जिले के किसानों के लिए भी पंजीयन सीमा बढ़ाई जानी चाहिए।
तीन वर्षों से आवेदन, अब तक नहीं हुआ समाधान
किसानों के अनुसार धान पंजीयन की सीमा बढ़ाने की मांग को लेकर पिछले तीन वर्षों से मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री और कलेक्टर को आवेदन देकर समस्या से अवगत कराया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस निराकरण नहीं हुआ है। किसानों का कहना है कि खेती में आधुनिक तरीकों और मेहनत के चलते उत्पादन बढ़ा है, लेकिन सरकारी खरीदी की पंजीयन सीमा कम होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने शासन से उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द निर्णय लेने की मांग की है।
दो साल से बंद छांटा खरीदी केंद्र शुरू कराने की मांग
इधर, विकासखंड समनापुर के ग्राम छांटा में दो वर्षों से बंद धान खरीदी केंद्र को दोबारा शुरू कराने की मांग भी उठी है। भाजपा समनापुर मंडल अध्यक्ष शिवराम राजपूत ने 30 अक्टूबर 2026 को सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित के प्रशासक महेंद्र सिंह यादव को पत्र सौंपकर आगामी धान खरीदी सत्र से छांटा केंद्र का संचालन प्रारंभ कराने का अनुरोध किया है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि छांटा में कई वर्षों से धान खरीदी केंद्र संचालित होता रहा है, जहां छांटा सहित आसपास के गांवों के किसान अपनी उपज बेचते थे। लेकिन पिछले दो वर्षों से खरीदी बंद होने के कारण किसानों को दूसरे केंद्रों तक जाना पड़ रहा है। इससे उन्हें अतिरिक्त दूरी तय करने के साथ परिवहन खर्च, समय और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
शिवराम राजपूत ने क्षेत्र के धान उत्पादक किसानों की सुविधा को देखते हुए छांटा खरीदी केंद्र को पुनः प्रारंभ कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
किसानों को शासन के फैसले का इंतजार
एक ओर किसान पंजीयन सीमा बढ़ाकर 45 क्विंटल करने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बंद खरीदी केंद्रों को शुरू कराने की मांग भी तेज हो रही है। किसानों का कहना है कि धान खरीदी व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे उन्हें अपनी पूरी उपज बेचने के लिए भटकना न पड़े और उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके। अब देखना होगा कि आगामी धान खरीदी सत्र से पहले शासन और प्रशासन इन मांगों पर क्या निर्णय लेते हैं।
