डिंडौरी। जिले की ग्राम पंचायतों में सरकारी राशि के खर्च और निर्माण कार्यों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कहीं सामग्री की खरीदी दरों में अंतर सामने आ रहा है, तो कहीं विभिन्न मदों में किए गए भुगतान और वित्त आयोग की राशि के उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दरअसल ताजा मामला जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत नेवसा का है। यहां एलईडी स्ट्रीट लाइटों की खरीदी पर करीब पांच लाख रुपये खर्च किए जाने के साथ मिठाई-नमकीन, डीजे-टेंट और अन्य मदों में भुगतान और 15वें वित्त आयोग की टाइड ग्रांट से सीसी सड़क निर्माण दर्ज होने के मामले में जांच की मांग उठ रही है। पंचायत से संबंधित उपलब्ध विवरण में सरपंच लालित बाई मरकाम और सचिव लालाराम नागेश के कार्यकाल में हुए इन खर्चों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
70 एलईडी लाइटों की खरीदी पर ₹5 लाख खर्च
बता दें कि ग्राम पंचायत नेवसा में पांचवें राज्य वित्त आयोग की राशि से 70 एलईडी स्ट्रीट लाइटों की खरीदी पर ₹5,00,990 खर्च किया गया है। इस हिसाब से प्रति लाइट की कीमत लगभग ₹7,157 बैठती है। खरीदी की इस दर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामला केवल नेवसा पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले की अलग-अलग ग्राम पंचायतों में स्ट्रीट लाइटों की खरीदी दरों में अंतर की बात भी सामने आ रही है।

एक ही विक्रेता, फिर कीमतों में इतना अंतर क्यों?
स्ट्रीट लाइटों की खरीदी दरों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिले की अलग-अलग ग्राम पंचायतों में एक ही विक्रेता से स्ट्रीट लाइटों की खरीदी अलग-अलग दरों पर की गई है। कहीं प्रति लाइट करीब ₹7,000, तो कहीं ₹9,000 और कुछ पंचायतों में ₹11,000 से ₹12,000 तक भुगतान किए जाने की बात सामने आ रही है।

ऐसे में सवाल उठता है कि जब विक्रेता एक ही है, तो अलग-अलग ग्राम पंचायतों में स्ट्रीट लाइटों की कीमतों में इतना अंतर क्यों है? क्या खरीदी के दौरान बाजार दरों और प्राप्त कोटेशन का तुलनात्मक आकलन किया गया था, या फिर अलग-अलग पंचायतों ने अपने स्तर पर कीमतें तय कीं?
मिठाई-नमकीन और डीजे-टेंट के नाम पर भी भुगतान
बता दें कि ग्राम पंचायत नेवसा सरपंच सचिव फूल-माला, नारियल, बिस्किट और गुलदस्ता खरीदी पर ₹24,150 के भुगतान इसी तरह बनारसी होटल के नाम पर नमकीन, बूंदी और मिठाई के लिए ₹36,000 का भुगतान और सत्यम डीजे टेंट हाउस के नाम पर अलग-अलग भुगतानों में ₹26,000 और ₹64,000 का भुगतान बिना जीएसटी के बिलों में तय नियमों को अनदेखी करते हुए किया गया है। वहीं स्वच्छता चित्रकार के नाम पर छह नग के लिए ₹43,200 के भुगतान का किया गया है। इन भुगतानों को लेकर सवाल है कि क्या खर्च के लिए सक्षम स्तर से स्वीकृति ली गई थी? क्या भुगतान के समर्थन में वैध बिल, सामग्री प्राप्ति का रिकॉर्ड और कार्य पूर्ण होने के प्रमाण उपलब्ध हैं। वहीं कई बिलों में जीएसटी का विवरण नहीं है ऐसे में संबंधित बिलों और लागू कर नियमों के पालन सवाल उठ रहे हैं।



₹11.22 लाख के आंगनवाड़ी भवन निर्माण में सामग्री की दरों पर सवाल
ग्राम पंचायत नेवसा में आंगनवाड़ी भवन निर्माण से जुड़े कार्य की लागत ₹11.22 लाख बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्य का नाम पंचायत सह आवासीय प्रशिक्षण निर्माण केंद्र के रूप में दर्ज बताया गया है। जिम्मेदारों के द्वारा बाजार दरों से अधिक कीमतों में निर्माण साम्रगी खरीद कर अपने चेहरे सप्लायरों के साथ सांठगांठ कमिश्नर का खेल खेला जा रहा है।
इस निर्माण कार्य में सामग्री की खरीदी किस दर पर की गई? क्या बाजार मूल्य का तुलनात्मक आकलन किया गया था? आपूर्तिकर्ता का चयन किस प्रक्रिया से हुआ और निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता की जांच किसने की? इन सवालों का जवाब स्वीकृत प्राक्कलन, बिल, कोटेशन, माप पुस्तिका और स्थल निरीक्षण कर जांच की माँग जा रही है।
टाइड ग्रांट से सीसी सड़क निर्माण, ₹3.18 लाख के खर्च कैसे..?
बता दें कि सरकार द्वारा तय नियमों के अनदेखी का मामला यहीं नहीं रुका, मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू 15वें वित्त आयोग की टाइड ग्रांट से संबंधित है। ‘मेरी पंचायत’ पोर्टल पर उपलब्ध विवरण के अनुसार, ग्राम पंचायत नेवसा में सीसी सड़क निर्माण की अनुमानित लागत ₹8 लाख और दर्ज व्यय ₹3.18लाख का भुगतना कर दिया गया है। इस कार्य में योजना के रूप में 15वां वित्त आयोग और अनुदान के प्रकार में टाइड ग्रांट का है।
जहां 15वें वित्त आयोग की टाइड ग्रांट का उपयोग निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत मुख्य रूप से पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता संबंधी कार्यों के लिए किया जाता है। ऐसे में सवाल है कि संबंधित सीसी सड़क निर्माण कार्य किस श्रेणी में स्वीकृत किया गया और क्या इसके लिए टाइड ग्रांट का उपयोग नियमानुसार अनुमन्य था? अब सवाल यह है क्या इसी तरह है विकास कार्यों की राशि का बंदरबाट होता रहेगा। और जनपद से लेकर पंचायत जिला पंचायत में बैठे निगरानी टीम सोती रहेगी। बरहाल आने वाले दिनों में पता चलेगा कि जिला प्रशासन मामले को कितना गंभीरता से लेती है। या यूं चलता रहेगा..?
