Big Breaking News : दिव्यांगता के प्रतिशत पर बवाल! शहपुरा के शिविर में डॉक्टरों और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस, वीडियो वायरल… देखें क्या पूरा मामला….

Rathore Ramshay Mardan
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—डिंडौरी के शहपुरा में सेवा संकल्प अभियान के शिविर में हंगामा, प्रमाण पत्रों में दिव्यांगता का प्रतिशत कम दर्ज करने के आरोपों से नाराज हुए हितग्राही

— डॉक्टरों और ग्रामीणों के बीच विवाद का VIDEO वायरल

 

डिंडौरी। दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और पात्र हितग्राहियों को चिह्नित करने के उद्देश्य से आयोजित शिविर में ही विवाद खड़ा हो गया। डिंडौरी जिले की जनपद पंचायत शहपुरा में सेवा संकल्प अभियान के तहत दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों के परीक्षण और चिन्हांकन के दौरान डॉक्टरों और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस हो गई। विवाद की वजह दिव्यांगता प्रमाण पत्रों में निर्धारित प्रतिशत कम दर्ज किए जाने के आरोप बताए जा रहे हैं। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में है।

जिस अभियान का उद्देश्य राहत देना, उसी शिविर में विवाद

शासन की मंशा है कि जरूरतमंदों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिले और दिव्यांगजनों को उनकी पात्रता के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसी उद्देश्य से शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। लेकिन शहपुरा में परीक्षण के दौरान उपजे विवाद ने शिविर की व्यवस्थाओं और हितग्राहियों की शिकायतों के निराकरण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दिव्यांगता प्रतिशत को लेकर क्यों नाराज हुए हितग्राही?

आरोप हैं कि परीक्षण के बाद प्रमाण पत्रों में दिव्यांगता का प्रतिशत कम दर्ज किए जाने को लेकर हितग्राहियों ने आपत्ति जताई। इसी मुद्दे पर ग्रामीणों और चिकित्सकों के बीच कहासुनी की स्थिति बन गई। दिव्यांगता का प्रतिशत कई सरकारी योजनाओं और सुविधाओं की पात्रता निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए इससे जुड़ी किसी भी विसंगति को लेकर हितग्राहियों की चिंता स्वाभाविक है।

हालांकि, वायरल वीडियो से पूरे घटनाक्रम की पुष्टि नहीं होती। आरोपों की वास्तविकता जानने के लिए संबंधित चिकित्सकों, हितग्राहियों और प्रशासन का पक्ष सामने आना जरूरी है।

पारदर्शी परीक्षण और शिकायतों के समाधान की जरूरत

दिव्यांगजनों के परीक्षण में चिकित्सकीय मानकों का पालन और निष्कर्षों की स्पष्ट जानकारी देना जरूरी है। यदि किसी हितग्राही को परीक्षण के परिणाम या प्रमाण पत्र में दर्ज प्रतिशत पर आपत्ति है, तो उसकी शिकायत सुनने और नियमानुसार पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए।

अब सवाल यह है कि शहपुरा के शिविर में विवाद की नौबत क्यों आई और दिव्यांगता प्रतिशत को लेकर उठे आरोपों पर जिम्मेदार अधिकारी क्या रुख अपनाते हैं? मामले में प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

 (मामले से जुड़ी अन्य जानकारी और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।)

 

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