— नामांतरण और फर्द बंटवारे की प्रक्रिया पर सवाल, पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की
डिंडौरी। जिले के विकासखंड डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत रामगुड़ा में सामने आए एक भूमि विवाद ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि कथित रूप से फर्जी वंशावली तैयार कर उनकी पैतृक भूमि के राजस्व अभिलेखों में दूसरे व्यक्ति का नाम दर्ज करा दिया गया तथा बाद में नामांतरण और फर्द बंटवारे की कार्रवाई भी पूरी कर ली गई।
पीड़ित परिवार का कहना है कि जिस जमीन पर उनका परिवार वर्षों से खेती करता आ रहा है, उसी भूमि पर गांव के जेवन पिता मंगल का नाम दर्ज कर दिया गया, जबकि उनका परिवार से कोई वैधानिक या रक्त संबंध नहीं है। परिवार का आरोप है कि इस पूरे मामले की नींव एक कथित फर्जी वंशावली पर रखी गई, जिसके आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव किया गया।
परिवार के अनुसार वंशावली में दर्ज रिश्तों में गंभीर विरोधाभास दिखाई देते हैं। आरोप है कि एक ओर चैती बाई को स्वर्गीय गुलाब सिंह का मामा-ससुर दर्शाया गया है, वहीं दूसरी ओर आनंद पिता जेवन द्वारा स्वर्गीय गुलाब सिंह को अपना नाना बताया गया है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि इन परस्पर विरोधी दावों से पूरे मामले में फर्जीवाड़े की आशंका और मजबूत होती है।
मामले में तत्कालीन ग्राम पंचायत के सरपंच और संबंधित पटवारी की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि बिना पर्याप्त जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के वंशावली प्रमाणित कर दी गई, जिसके आधार पर आगे की राजस्व कार्रवाई पूरी हुई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब राजस्व विभाग की टीम सीमांकन के लिए मौके पर पहुंची। ग्रामीणों का आरोप है कि सीमांकन की कार्रवाई से पहले प्रभावित पक्ष को न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही सूचना। कार्रवाई शुरू होते ही दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति निर्मित हो गई।
पीड़ित परिवार लगातार तहसील और एसडीएम कार्यालय के चक्कर लगाकर निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि यदि वंशावली, नामांतरण और राजस्व रिकॉर्ड की गहन जांच कराई जाए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। ग्रामीणों ने भी उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करेंगे। उनका कहना है कि यह केवल एक परिवार की जमीन का मामला नहीं बल्कि पूरे राजस्व तंत्र की विश्वसनीयता और पारदर्शिता से जुड़ा विषय है।
फिलहाल रामगुड़ा का यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला सरकारी अभिलेखों में कथित हेरफेर और जवाबदेही का बड़ा उदाहरण बन सकता है, वहीं जांच में आरोप निराधार पाए जाने पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।




