Health News : डिंडौरी स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप ! आयुष्मान भुगतान जांच में गंभीर अनियमितताएं उजागर ,कलेक्टर ने डॉक्टर पर कार्रवाई के लिए भेजा पत्र…

Rathore Ramshay Mardan
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— जांच रिपोर्ट में खुलीं आयुष्मान भुगतान की परतें, डिंडौरी कलेक्टर ने भेजा कार्रवाई पत्र

डिंडौरी। विकासखंड शहपुरा के खंड स्तरीय चिकित्सालय में आयुष्मान भारत निरामय योजना के तहत प्रोत्साहन राशि वितरण में अनियमितताओं की शिकायत को कलेक्टर ने गंभीरता से लेते हुए जांच कराई। जांच में वित्तीय अनियमितताओं एवं प्रशासनिक लापरवाही के संकेत मिलने पर कलेक्टर ने संबंधित डॉक्टर के विरुद्ध कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र भेजा है।

 

जानकारी के अनुसार, जिला स्तरीय गठित जांच समिति में अनुविभागीय अधिकारी शहपुरा, पेंशन अधिकारी, जिला आयुष्मान नोडल अधिकारी एवं जिला आयुष्मान समन्वयक शामिल थे। समिति द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में तत्कालीन मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी शहपुरा एवं वर्तमान में मेंहदवानी में पदस्थ चिकित्सा अधिकारी डॉ. सत्येंद्र परस्ते की भूमिका संदिग्ध पाई गई।

 

जांच में सामने आया कि डॉ. परस्ते प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्यरत होने के बावजूद चिकित्सक के रूप में अन्य डॉक्टरों की तुलना में कई गुना अधिक आयुष्मान प्रोत्साहन राशि प्राप्त कर रहे थे। ड्यूटी रोस्टर में नाम नहीं होने के बावजूद उन्होंने स्वयं को मेडिकल स्पेशलिस्ट दर्शाकर राशि प्राप्त की।

संयुक्त जांच प्रतिवेदन के अनुसार डॉ. परस्ते ने मेडिकल स्पेशलिस्ट के रूप में 30 प्रतिशत की दर से 7 लाख 1 हजार 992 रुपए 20 पैसे प्राप्त किए, जबकि नियमानुसार उन्हें 10 प्रतिशत की दर से केवल 2 लाख 33 हजार 997 रुपए 40 पैसे ही मिलने थे। हालांकि डॉ. परस्ते ने अपने जवाब में कहा कि वे मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यरत थे, इसलिए 30 प्रतिशत की दर से राशि प्राप्त करना उचित था।

 

जांच के दौरान कई अन्य अनियमितताएं भी उजागर हुईं। कुछ कर्मचारियों को एक वर्ष से अधिक मातृत्व अवकाश पर रहने के बावजूद प्रोत्साहन राशि आवंटित की गई। वहीं वार्डबॉय के रूप में कार्य नहीं करने वाले कर्मचारी आशुतोष रजक के खाते में भी राशि डाले जाने का मामला सामने आया। इसके अलावा कुछ कर्मचारियों के स्थानांतरण के बाद भी उन्हें प्रोत्साहन राशि जारी किए जाने की जानकारी जांच में मिली है।

 

इधर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा प्रस्तुत अभिमत में कहा गया कि जांच दल ने दस्तावेजों का सूक्ष्म परीक्षण किए बिना प्राथमिक आधार पर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है। साथ ही डॉ. परस्ते के प्रतिउत्तर और जांच रिपोर्ट में कई बिंदुओं पर विरोधाभास भी पाया गया है।

 

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