Politics News : 2 करोड़ 49 लाख की कुर्सी-टेबल पर सियासी संग्राम,डिंडौरी में विधायक निधि खर्च को लेकर गरमाई राजनीति….

Rathore Ramshay Mardan
3 Min Read

कुर्सी-टेबल पर विधायक का नाम, मचा राजनीतिक तूफान! डिंडौरी में गरमाई सियासत

 

डिंडौरी। छात्रों को बेहतर सुविधा देने के उद्देश्य से विधायक निधि से खरीदी गई कुर्सी-टेबल अब जिले में सियासी संग्राम का कारण बन गई हैं। डिंडौरी से कांग्रेस विधायक ओमकार मरकाम द्वारा करीब 2 करोड़ 49 लाख रुपये की लागत से स्कूलों और कॉलेजों में एक हजार कुर्सी-टेबल बांटी गईं, लेकिन अब इन्हीं कुर्सी-टेबलों की कीमत और उन पर लिखे विधायक के नाम को लेकर राजनीति गरमा गई है।

 

जानकारी के मुताबिक 9 फरवरी 2026 को जारी आदेश के तहत जिले के कई स्कूलों और चार महाविद्यालयों में कुर्सी-टेबल उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी गई थी। प्रति सेट की कीमत 23 हजार 650 रुपये तय की गई। भाजपा ने इसी कीमत पर सवाल उठाते हुए इसे सरकारी पैसे की बर्बादी बताया है।

 

विवाद उस समय और बढ़ गया जब कुर्सी-टेबल पर महापुरुषों की तस्वीरों और शिक्षा संबंधी संदेशों के साथ विधायक ओमकार मरकाम का नाम भी अंकित मिला। भाजपा जिला अध्यक्ष चमरू सिंह नेताम ने आरोप लगाया कि विधायक निधि का इस्तेमाल छात्रों की सुविधा से ज्यादा राजनीतिक प्रचार के लिए किया गया है। उनका कहना है कि बाजार में इसी तरह की कुर्सी-टेबल 4 से 5 हजार रुपये में तैयार हो जाती हैं, जबकि यहां एक सेट पर 23 हजार रुपये से ज्यादा खर्च किए गए।

 

हालांकि दूसरी तरफ कुछ छात्र इस पहल को राहत भरा कदम मान रहे हैं। समनापुर कॉलेज की छात्रा वर्षा यादव ने कहा कि पहले कई बार छात्रों को बैठने में परेशानी होती थी, लेकिन अब व्यवस्था बेहतर हुई है। कॉलेज के सहायक प्राध्यापक राजेश्वर पटले ने भी पुष्टि की कि कॉलेज में कुर्सी-टेबल पहुंच चुकी हैं और उपयोग में लाई जा रही हैं। वहीं कुछ कॉलेजों के प्राचार्यों ने साफ कहा कि उनके यहां अब तक सामग्री नहीं पहुंची है और कॉलेजों को लाइब्रेरी व प्रैक्टिकल लैब जैसी सुविधाओं की ज्यादा जरूरत है।

 

इधर विधायक ओमकार मरकाम ने भाजपा के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र भ्रमण के दौरान छात्रों ने बैठने की समस्या बताई थी, जिसके बाद विधायक निधि से यह निर्णय लिया गया। विधायक का कहना है कि विकास कार्यों को भी अब राजनीति की नजर से देखा जा रहा है। अब सवाल सिर्फ कुर्सी-टेबल का नहीं, बल्कि जनता के पैसों के इस्तेमाल और राजनीति की नीयत का बन गया है। जिले में यह मामला चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है।

 

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