डिंडौरी। गांवों के विकास की सबसे मजबूत नींव पंचायतें मानी जाती हैं। इन्हीं पंचायतों के माध्यम से सरकार गांव-गांव तक योजनाओं की रोशनी पहुँचाना चाहती है। पर दुर्भाग्य यह है कि आज कई जगह पंचायतें विकास का प्रतीक नहीं, भ्रष्टाचार का अड्डा बनती जा रही हैं।
डिंडौरी की सरसवाही पंचायत का मामला इसका ताजा उदाहरण है — जहां जनसेवा के नाम पर फर्जी बिल, बिना कार्य किए भुगतान, और शासकीय राशि का दुरुपयोग सामने आया है। यह न केवल जनता के विश्वास से खिलवाड़ है, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों पर चोट भी है।
दरअसल ग्राम पंचायत सरवाही के वर्तमान पंचगणों ने जिला अधिकारी डिंडौरी को सामूहिक रूप से शिकायत प्रस्तुत कर वर्तमान सरपंच भीकम सिंह बरकड़े, उनके पुत्र देवराज सिंह बरकड़े और पंचायत सचिव विजय कुशराम पर सरकारी राशि के फर्जी बिल लगाकर गबन करने का आरोप लगाया है।
दिए गए आवेदन में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2022-23 से लेकर वर्तमान तक ग्राम पंचायत सरसवाही में अनेक निर्माण एवं विकास कार्यों के नाम पर राशि आहरित की गई, किंतु अधिकांश कार्य स्थलीय रूप से संपन्न नहीं हुए हैं। ग्रामवासियों ने बताया कि सोखता फिट, चबूतरा निर्माण, लीच फिट, सीसी रोड मरम्मत एवं सार्वजनिक शौचालय जैसे कार्यों के लिए बिल भुगतान तो किया गया, किंतु आज तक कोई कार्य स्थल पर दिखाई नहीं देता।
आवेदनकर्ताओं के अनुसार पंचायत सचिव विजय कुशराम और सरपंच के पुत्र देवराज सिंह द्वारा अपने नाम से तथा कथित सप्लायर्स के नाम पर फर्जी बिल प्रस्तुत कर राशि आहरित की गई। बिलों में “अजीत ट्रेडर्स, अग्रवाल ट्रेडर्स, अजय किराना, विकास मेटल” जैसे नाम शामिल हैं, जबकि इनमें से कुछ सप्लायर्स वास्तव में पंचायत कार्यों में संलग्न ही नहीं हैं। यहां तक कि एक मेट लवलेश परस्ते के नाबालिग पुत्र के नाम से भी सप्लायर का बिल बनाया गया है।
ग्रामवासियों ने बताया कि पंचायत में ग्रामसभा की स्वीकृति लिए बिना ही कार्यों की स्वीकृति दी जाती है, और जब पंचगण या ग्रामवासी लेखाजोखा मांगते हैं तो उन्हें पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने की धमकी दी जाती है। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। पंचगणों ने कलेक्टर डिंडौरी से निवेदन किया है कि ग्राम पंचायत सरसवाही की समस्त वित्तीय लेनदेन एवं आहरित राशि की विस्तृत जांच कराई जाए और दोषियों के विरुद्ध कड़ी प्रशासनिक कार्यवाही की जाए।





