— जनपद पंचायत शहपुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत कंचनपुर का मामला
डिंडौरी। जनपद पंचायत क्षेत्र की एक ग्राम पंचायत कंचनपुर का सामने आए भ्रष्टाचार के मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। जांच में स्पष्ट रूप से दोषी पाए जाने के बावजूद संबंधितों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है, जिससे स्थानीय स्तर पर नाराजगी बढ़ती जा रही है।
दरअसल मामले की शुरुआत उपसरपंच द्वारा की गई शिकायत से हुई, जिसमें निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर 9 बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। शिकायत के बाद तत्कालीन कलेक्टर ने जांच समिति का गठन किया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट में सरपंच, सचिव और उपयंत्री को दोषी ठहराते हुए 2 दिसंबर 2025 को प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
इसके बाद 5 फरवरी 2026 को संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन इसके बाद कार्रवाई की प्रक्रिया ठहर सी गई है। चार माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जिम्मेदारों पर कोई निर्णायक कदम नहीं उठाया गया है।
यह भी सामने आया है कि इससे पूर्व भी निर्माण कार्यों में अनियमितताओं को लेकर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। उस प्रकरण में 5 लाख 65 हजार रुपये की रिकवरी के आदेश जारी हुए थे। हालांकि, उच्च न्यायालय से आंशिक राहत मिलने के बाद भी राशि जमा करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि शासन की राशि का सही उपयोग नहीं किया गया और नियमों को दरकिनार कर वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी की गई। उनका कहना है कि यदि समय पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह प्रवृत्ति आगे और बढ़ सकती है।
उपसरपंच सहित ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र एवं निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि दोष तय होने के बावजूद देरी से कार्रवाई होना न केवल प्रशासनिक निष्क्रियता को दर्शाता है, बल्कि इससे आमजन का भरोसा भी कमजोर होता है। मामले को लेकर प्रशासन की चुप्पी अब चर्चा का विषय बन चुकी है और लोग जल्द निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।




