भोपाल। व्ही.आई.टी. भोपाल विश्वविद्यालय, सीहोर में विद्यार्थियों के उग्र आंदोलन और आगजनी प्रकरण के बाद मध्य प्रदेश शासन, उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अधिनियम 2007 की धारा 41(1) के तहत जारी इस नोटिस में 07 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है, अन्यथा धारा 41(2) के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग की तीन सदस्यीय जांच समिति के प्रतिवेदन के आधार पर विभाग ने कई गंभीर अनियमितताओं और लापरवाही के बिंदुओं को उजागर किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि विश्वविद्यालय में रह रहे लगभग 15,000 विद्यार्थियों के लिए छात्रावासों की मेस सेवाएं अत्यंत खराब पाई गईं। भोजन और पेयजल की गुणवत्ता पर छात्रों की शिकायतें गंभीर हैं। समिति के समक्ष प्रबंधन ने यह स्वीकार किया कि 14 से 24 नवंबर के बीच 35 विद्यार्थी पीलिया से ग्रस्त मिले, परंतु स्वास्थ्य रिकार्ड और अन्य अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि विश्वविद्यालय परिसर को “किले जैसी व्यवस्था” में संचालित किया जा रहा है, जहाँ शिकायत करने पर विद्यार्थियों को प्रताड़ना का भय बना रहता है। छात्रों ने समिति को बताया कि अनुशासन के नाम पर आई-कार्ड जब्त करने, परीक्षा में शामिल न करने या कम अंक देने की धमकियाँ दी जाती हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को भी दो घंटे तक मुख्य द्वार पर रोके रखने की घटना को गंभीरता से लिया गया है।
स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति चिंताजनक बताई गई है, जहाँ न तो उचित रिकार्ड पाया गया और न ही क्लिनिकल स्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत पंजीयन। मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट और पेयजल के माइक्रोबायोलॉजिकल परीक्षण जैसी बुनियादी व्यवस्थाएँ भी नदारद हैं। पीलिया फैलने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने रोकथाम के प्रयासों के कोई सबूत समिति को नहीं दिए।
समिति के अनुसार छात्रों के बढ़ते असंतोष को समझने में प्रबंधन पूरी तरह विफल रहा। बीमार छात्रों को अस्पताल ले जाने के बजाय घर भेजने की सलाह और वॉर्डन एवं गार्ड द्वारा दुर्व्यवहार से स्थिति और भड़क गई, जिसके बाद रात में विद्यार्थियों ने उग्र प्रदर्शन किया। व्यवस्थाओं पर नियंत्रण खोने के बाद प्रशासन ने रात 2 बजे पुलिस को सूचना दी।
रिपोर्ट में विश्वविद्यालय प्रशासन पर पारदर्शिता के अभाव और अधिकारों के अत्यधिक केंद्रीकरण के आरोप भी लगाए गए हैं। समिति ने यह भी उल्लेख किया कि जांच के दौरान प्रबंधन का रुख असहयोगात्मक रहा। उच्च शिक्षा विभाग ने कुलाधिपति से 7 दिवस के भीतर उपरोक्त सभी बिंदुओं पर विस्तृत स्पष्टीकरण देने को कहा है, अन्यथा एकपक्षीय कार्रवाई की बात कही गई है।




