मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग जबलपुर संभाग द्वारा डिंडौरी जिले की जनजातीय कन्या आश्रम शाला कोहानीदेवरी (शहपुरा) की तत्कालीन अधीक्षिका एवं माध्यमिक शिक्षक श्रीमती डॉली कोर्चे को गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है।
7 अगस्त 2025 को संभागीय उपायुक्त द्वारा छात्रावास का आकस्मिक निरीक्षण किया गया, जिसमें शौचालयों के दरवाजे टूटे पाए गए, सैप्टिक टैंक भरा हुआ था, पंखे व बटन खराब थे और विद्युत तार लटके हुए मिले। छात्रों के निवास कक्ष और अन्य सुविधाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय पाई गई, जबकि संस्था को नियमित रूप से राशि आवंटित की जा रही थी।
5 साल में ₹5.76 लाख का आवंटन, कोई कार्य नहीं
जांच में पाया गया कि वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक संस्था को हर साल ₹1,15,250 के हिसाब से कुल ₹5,76,250 का आवंटन मिला, जिसमें मरम्मत और आकस्मिक व्यय भी शामिल थे। परंतु न तो कोई कार्य कराया गया, न ही बिल-वाउचर और स्टॉक पंजी संधारित किए गए।
बता दें कि जारी आदेश में उल्लेखित किया गया है कि श्रीमती कोर्चे ने स्वयं स्वीकार किया कि उन्हें यह राशि प्राप्त हुई थी। विभाग ने इसे शासन की राशि का दुरुपयोग और गबन मानते हुए गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में लिया।
तत्काल प्रभाव से निलंबन
मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 और वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियम 1966 के अंतर्गत अधीक्षिका को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, शहपुरा, जिला डिंडौरी नियत किया गया है। उन्हें नियम अनुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिले के अधिकांश छात्रावासों की स्थिति भी इसी तरह की बताई जा रही है। यदि विभाग द्वारा निष्पक्ष जांच कराई जाती है, तो एक बड़ा घोटाला उजागर हो सकता है। खैर, आने वाला समय ही तय करेगा कि भ्रष्टाचारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई होगी या फिर केवल खानापूर्ति कर उन्हें अभयदान दे दिया जाएगा।




