
— 99 हजार से अधिक शिक्षकों की उम्मीदें बढ़ीं, 6 नवंबर को ग्वालियर खंडपीठ ने करुणा शर्मा की याचिका पर सुनाया अहम फैसला
मध्य प्रदेश में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर शिक्षकों के लिए बड़ी राहत भरा फैसला सामने आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि शिक्षाकर्मी के रूप में दी गई पूर्व सेवा को पेंशन संबंधी लाभों के लिए भी मान्य किया जाना चाहिए। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को पुरानी पेंशन योजना का पात्र मानते हुए राज्य सरकार को नई पेंशन योजना (NPS) से पुरानी पेंशन योजना (OPS) में फंड स्थानांतरित करने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।
यह महत्वपूर्ण आदेश 6 नवंबर 2026 को न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत की एकलपीठ ने रिट याचिका क्रमांक WP-45401/2026, करुणा शर्मा विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन एवं अन्य में पारित किया। आदेश में न्यायालय ने राज्य सरकार की उस दलील को स्वीकार नहीं किया, जिसमें शिक्षाकर्मी संवर्ग के अध्यापक संवर्ग में संविलियन के बाद नियुक्ति को नई नियुक्ति मानते हुए पुरानी पेंशन का लाभ देने से इनकार किया जा रहा था।
1998 में हुई थी शिक्षाकर्मी के रूप में नियुक्ति
न्यायालय के आदेश के अनुसार, याचिकाकर्ता करुणा शर्मा की नियुक्ति 18 सितंबर 1998 को जिला पंचायत के माध्यम से शिक्षाकर्मी ग्रेड-2 के पद पर हुई थी। उनकी सेवाएं 17 जुलाई 2002 को नियमित की गईं। इसके बाद वर्ष 2008 के नियमों के तहत शिक्षाकर्मियों का अध्यापक संवर्ग में संविलियन किया गया। याचिकाकर्ता को 12 अगस्त 2014 को वरिष्ठ अध्यापक के पद पर पदोन्नति मिली तथा 18 जनवरी 2019 को उच्च माध्यमिक शिक्षक के पद पर नियुक्त किया गया।
इसके बावजूद उन्हें पुरानी पेंशन के बजाय राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के दायरे में रखा जा रहा था। इसी के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
पूर्व सेवा को पेंशन के लिए भी मानना होगा
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा सेवा (शिक्षण संवर्ग) सेवा शर्तें एवं भर्ती नियम, 2018 के प्रावधानों का हवाला दिया गया। सरकार का तर्क था कि शिक्षाकर्मियों की पूर्व सेवा का लाभ केवल वरिष्ठता, पदोन्नति और क्रमोन्नति के लिए दिया जा सकता है, पुरानी पेंशन के लिए नहीं।
इस पर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि जब शिक्षाकर्मी की पूर्व सेवा को पदोन्नति और क्रमोन्नति के लिए मान्यता दी जा रही है, तो उसी सेवा को पेंशन संबंधी लाभों के लिए नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने माना कि शिक्षाकर्मी से अध्यापक संवर्ग में संविलियन को नई नियुक्ति नहीं माना जा सकता और संविलियन से पहले की गई सेवा को पेंशन की गणना में शामिल किया जाना चाहिए।
NPS से OPS में फंड ट्रांसफर करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने अपने आदेश के पैरा 9 में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता पुरानी पेंशन योजना का लाभ पाने की अधिकारी हैं और उन्हें नई पेंशन योजना के अंतर्गत नहीं रखा जाएगा। न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को फंड की व्यवस्था करने और नई पेंशन योजना से पुरानी पेंशन योजना में राशि स्थानांतरित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही याचिका का निराकरण कर दिया गया।
99 हजार शिक्षकों की उम्मीदें बढ़ीं
हाईकोर्ट के इस फैसले से प्रदेश के उन हजारों शिक्षकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं, जिनकी नियुक्ति वर्ष 1998 से 2005 के बीच शिक्षाकर्मी के रूप में हुई थी और बाद में उनका अध्यापक संवर्ग में संविलियन किया गया। ऐसे शिक्षकों की संख्या 99 हजार से अधिक बताई जा रही है। हालांकि, न्यायालय का यह आदेश करुणा शर्मा की व्यक्तिगत याचिका में पारित हुआ है। प्रदेश के अन्य शिक्षकों को इसका लाभ किस प्रकार और किन शर्तों पर मिलेगा, यह सरकार के आगामी निर्णय और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
अब शिक्षक संगठनों की मांग है कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के इस फैसले की भावना के अनुरूप पात्र शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने के लिए शीघ्र आवश्यक कदम उठाए, ताकि वर्षों से लंबित पुरानी पेंशन की मांग पर राहत मिल सके।


