Health News : MP 2 लाख गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क! सिर्फ 30% की समय पर भर्ती… समीक्षा में सामने आई बड़ी चिंता, जानिए क्या है पूरा मामला…

Rathore Ramshay Mardan
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उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा कर दिए निर्देश, अनमोल पोर्टल और सुमन कमांड सेंटर से होगी निगरानी

भोपाल। मध्यप्रदेश में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित स्वास्थ्य जांच और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए कहा कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य संस्थानों में भर्ती कराना सुनिश्चित किया जाए। समीक्षा के दौरान सामने आया कि चिन्हित उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं में से लगभग 30 प्रतिशत ही पर्याप्त समय पहले अस्पतालों में भर्ती हो पा रही हैं। इस स्थिति में सुधार के लिए उन्होंने विशेष कार्ययोजना बनाकर समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए।

करीब 2 लाख गर्भवती महिलाएं उच्च जोखिम की श्रेणी में

समीक्षा बैठक में जानकारी दी गई कि अनमोल पोर्टल पर प्रदेश की लगभग 6.2 लाख गर्भवती महिलाओं का विवरण दर्ज है। इनमें करीब 2 लाख महिलाओं को उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के रूप में चिह्नित किया गया है। इन महिलाओं के स्वास्थ्य की निगरानी और फॉलोअप के लिए सुमन इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर की मदद ली जा रही है।

उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान के बाद उनकी नियमित जांच, आवश्यक उपचार और समय पर अस्पताल में भर्ती की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। आशा एवं एएनएम सहित मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी तय करते हुए फॉलोअप की नियमित समीक्षा की जाए, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।

ई-संजीवनी से गांवों में मिलेगा विशेषज्ञ डॉक्टरों का परामर्श

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा का प्रभावी उपयोग करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सकों का परामर्श उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके लिए लोगों को सेवा के प्रति जागरूक करने, आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने और तकनीकी बाधाओं को दूर करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि ई-संजीवनी सेवाओं के उपयोग और परिणामों की नियमित समीक्षा की जाए, जिससे मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श के लिए अनावश्यक रूप से दूर-दराज के अस्पतालों तक नहीं जाना पड़े।

93.4 प्रतिशत संस्थागत प्रसव दर्ज

वित्तीय वर्ष 2026-27 में सितंबर तक के आंकड़ों के अनुसार, मध्यप्रदेश में 90.6 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं का पहली तिमाही में पंजीयन हुआ है, जबकि 93.4 प्रतिशत संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए हैं। एसआरएस 2022-24 के अनुसार प्रदेश में मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 135 है।

गर्भवती महिलाओं की बेहतर देखभाल के लिए प्रदेश में 35 प्रसूति आईसीयू, 109 प्रथम रेफरल इकाइयां और 229 बर्थ वेटिंग होम संचालित हैं। उप मुख्यमंत्री ने इन सुविधाओं का प्रभावी उपयोग करते हुए मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करने के निर्देश दिए।

नवजात और गंभीर बीमार बच्चों के उपचार पर जोर

बैठक में नवजात शिशुओं और गंभीर रूप से बीमार बच्चों के उपचार की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। प्रदेश में 62 विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयां (एसएनसीयू), 200 नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाइयां (एनबीएसयू), 24 मदर न्यूबॉर्न केयर यूनिट, 68 बाल गहन चिकित्सा इकाइयां (पीआईसीयू) और 318 पोषण पुनर्वास केंद्र संचालित हैं।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में एसएनसीयू में 1,34,317, एनबीएसयू में 45,982 नवजात शिशुओं तथा पीआईसीयू में 1,19,032 बच्चों को भर्ती कर उपचार दिया गया। इसी अवधि में पोषण पुनर्वास केंद्रों में 80,092 बच्चों को सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।

अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान एसएनसीयू में 72,595, एनबीएसयू में 22,793 और पीआईसीयू में 59,450 बच्चों को भर्ती कर उपचार दिया गया। वहीं, पोषण पुनर्वास केंद्रों में 47,912 बच्चों को सेवाएं प्रदान की गईं।

एनीमिया मुक्त भारत अभियान में मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय सम्मान

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, एनीमिया मुक्त भारत अभियान के क्रियान्वयन और नवाचार आधारित जन-जागरूकता गतिविधियों में मध्यप्रदेश को अगस्त 2026 में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में प्रथम स्थान मिला। वहीं, एएमबी इंडेक्स 2025-26 में आयरन एवं फोलिक एसिड के निवारक अनुपूरण के मामले में प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त हुआ।

अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान ई-संजीवनी के माध्यम से प्रदेश में 59,914 जनरल टेली-कंसल्टेशन और 10,890 विशेषज्ञ टेली-कंसल्टेशन किए गए। बैठक में उप मुख्यमंत्री ने विभागीय समन्वय, डिजिटल तकनीक और मैदानी स्वास्थ्य अमले की सक्रियता के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए। बैठक में वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. प्रभाकर तिवारी, डॉ. अर्चना मिश्रा सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

 

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