मध्यप्रदेश में पुरानी पेंशन योजना को लेकर शिक्षाकर्मियों के लिए महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर ने एक मामले में 1998 में नियुक्त शिक्षाकर्मी को पुरानी पेंशन योजना (GPF) का लाभ देने का आदेश दिया है। इस फैसले से प्रदेश के हजारों पूर्व शिक्षाकर्मियों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। हालांकि, करीब 70 हजार शिक्षाकर्मियों को इसका लाभ स्वतः मिलेगा या नहीं, यह संबंधित नियमों और आदेश के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
शासकीय शिक्षक संगठन, जिला डिंडौरी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उच्च न्यायालय ने रिट याचिका क्रमांक 25680/2025 में याचिकाकर्ता सुशील कुमार तिवारी के मामले में महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। तिवारी की नियुक्ति जिला पंचायत द्वारा 22 अगस्त 1998 को शिक्षाकर्मी ग्रेड-2 के पद पर की गई थी। इसके बाद वे 29 जून 2002 को नियमित हुए और वर्ष 2008 में अध्यापक संवर्ग में विलय हुआ।
नई नियुक्ति नहीं, पुरानी सेवा को माना गया आधार
संगठन के मुताबिक, न्यायालय ने मामले में शिक्षाकर्मी के रूप में हुई प्रारंभिक नियुक्ति और बाद में अध्यापक संवर्ग में हुए विलय के पहलुओं पर विचार किया। संगठन का कहना है कि इस निर्णय से पुरानी नियुक्ति के आधार पर पेंशन संबंधी अधिकारों का दावा मजबूत हुआ है।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को एनपीएस (नई पेंशन योजना) से जीपीएफ (सामान्य भविष्य निधि) में राशि हस्तांतरित करने के लिए आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, आदेश की प्रमाणित प्रति और उसकी सटीक शर्तों के आधार पर ही निर्णय के दायरे की पुष्टि की जा सकती है।
70 हजार शिक्षाकर्मियों को राहत मिलने की उम्मीद
शासकीय शिक्षक संगठन, जिला डिंडौरी के जिला अध्यक्ष राम कुमार गर्ग ने कहा कि यह आदेश प्रदेश के लगभग 70 हजार शिक्षाकर्मियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। उनके अनुसार, सितंबर 2001 और 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षाकर्मियों के मामलों में पुरानी नियुक्ति की तारीख और तत्कालीन सेवा नियमों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाना चाहिए।
गर्ग ने मांग की कि पात्र शिक्षाकर्मियों को एनपीएस से जीपीएफ में समायोजन का लाभ दिया जाए और पुरानी पेंशन के संबंध में स्थिति स्पष्ट की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में नियुक्त शिक्षाकर्मियों को टीईटी से छूट सहित अन्य संबंधित मांगों पर भी नियमानुसार निर्णय लिया जाना चाहिए।
शिक्षा विभाग से स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग
शासकीय शिक्षक संगठन ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि उच्च न्यायालय के निर्णय के परिपालन में सभी जिला पंचायतों एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं, ताकि पात्र कर्मचारियों के पेंशन संबंधी मामलों का निराकरण हो सके।

