— बैंक का ₹2.07 करोड़ से अधिक बकाया, कर्ज वसूली रोकने के लिए बेटियों के नाम से मुकदमे दायर कराने का भी आरोप
भोपाल। बेटियों के नाम वर्ष 2013 में हिबानामा (दान) कर दी गई जमीन को कथित तौर पर अपनी संपत्ति बताकर बैंक में गिरवी रखने और करीब ₹2 करोड़ का लोन लेने के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने भोपाल के बिल्डर जीशान अली और उनकी पत्नी नाजनीन अली के खिलाफ FIR दर्ज की है। जांच में सामने आया कि पंजाब नेशनल बैंक से लिए गए ऋण की राशि वापस नहीं की गई और बैंक का बकाया बढ़कर ₹2,07,86,807.48 रुपये हो गया। EOW ने इस मामले में 14 अक्टूबर 2026 को अपराध क्रमांक 106/2026 दर्ज कर विवेचना शुरू की है।
— ये रहा पूरा मामला
EOW की प्रेस ब्रीफ के अनुसार, मामला भोपाल के हुजूर तहसील क्षेत्र के ग्रास जातडिसकलां स्थित 526.83 वर्गमीटर व्यावसायिक जमीन से जुड़ा है। यह जमीन वर्ष 2008 में जीशान अली के नाम रजिस्टर्ड हुई थी। इसके बाद 10 जुलाई 2013 को जीशान अली ने हिबानामे के माध्यम से जमीन अपनी तीन बेटियों के नाम कर दी थी। इनमें से दो बेटियां उस समय नाबालिग थीं। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि जीशान अली ने 20 फरवरी 2018 को बैंक के मुख्य प्रबंधक को लिखे पत्र में हिबानामे का उल्लेख किया था।
इसके बावजूद EOW की जांच के मुताबिक, वर्ष 2015 में इसी जमीन को जीशान अली की संपत्ति बताकर बैंक से ऋण लेने की प्रक्रिया अपनाई गई। बैंक की 22 सितंबर 2015 की लीगल सर्च रिपोर्ट में जमीन को हस्तांतरण योग्य बताया गया, जबकि नाबालिगों के हित से संबंधित कॉलम में ‘None’ दर्ज था। रिपोर्ट में हिबानामे का उल्लेख नहीं होने के बाद 24 सितंबर 2015 को मेसर्स रॉयल हेरिटेज बिल्डर्स कॉलोनाइजर्स इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के लिए ₹2 करोड़ की ओवरड्राफ्ट सीमा स्वीकृत की गई।
जांच में पाया गया कि ऋण से संबंधित अनुबंधों में जीशान अली, नाजनीन अली और कंपनी से जुड़ी निकहत शमीस की भूमिका थी। जमीन को ऋण की सुरक्षा के रूप में दर्शाया गया और नवंबर 2015 में उसका बंधक विलेख पंजीकृत कराया गया। EOW के अनुसार, अनुबंधों में संपत्ति पर किसी मुकदमे, भार या अन्य दावे के लंबित नहीं होने की घोषणा भी की गई थी।
नाबालिग बेटी की संपत्ति बेचने के लिए अदालत से ली थी अनुमति
EOW की जांच में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि फरवरी 2015 में जीशान अली और नाजनीन अली ने अपनी नाबालिग बेटी के नाम दर्ज एक अन्य प्लॉट को बेचने के लिए जिला न्यायालय से अनुमति प्राप्त की थी। जांच एजेंसी के अनुसार, इससे यह संकेत मिलता है कि उन्हें नाबालिग की संपत्ति के संबंध में न्यायालय की अनुमति की आवश्यकता की जानकारी थी। इसके बावजूद बेटियों के नाम पहले ही की जा चुकी जमीन को बैंक में गिरवी रखने के मामले में आवश्यक अनुमति नहीं लिए जाने का आरोप है।
लोन NPA होने के बाद शुरू हुआ कानूनी विवाद
प्रेस ब्रीफ के मुताबिक, वर्ष 2017 में ऋण खाता एनपीए हो गया। बैंक की ओर से SARFAESI कानून के तहत कार्रवाई के लिए नोटिस जारी होने से पहले ही 4 अक्टूबर 2017 को बेटियों की ओर से सिविल वाद दायर किया गया। इस वाद में दावा किया गया कि जमीन उनकी है और बैंक उस पर कब्जा या वसूली की कार्रवाई नहीं कर सकता। बाद में वाद खारिज होने के बाद 10 सितंबर 2018 को ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरण (DRAT), इलाहाबाद में अपील दायर की गई।
EOW के अनुसार, बैंक ने 21 नवंबर 2018 को अदालत में दिए अपने जवाब में इस मुकदमे को जीशान अली की मिलीभगत से चलाया जा रहा ‘प्रॉक्सी लिटिगेशन’ बताया था। जांच एजेंसी ने पंजाब नेशनल बैंक, उप-पंजीयक कार्यालय भोपाल, ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) जबलपुर और DRAT इलाहाबाद के रिकॉर्ड का परीक्षण किया।
DRT ने बैंक के पक्ष में दिया था फैसला
जांच में सामने आया कि DRT जबलपुर ने 8 मार्च 2019 को बैंक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए वसूली प्रमाणपत्र जारी किया था। इसके बावजूद बैंक की ₹2,07,86,807.48 रुपये की राशि अब तक वापस नहीं हुई है। EOW के मुताबिक, ऋण लेते समय हिबानामे की जानकारी छिपाने और बाद में बैंक की वसूली रोकने के लिए कानूनी मुकदमों का सहारा लेने के आरोपों की जांच की गई है।
इन तथ्यों के आधार पर EOW ने जीशान अली और नाजनीन अली के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4) (धोखाधड़ी) और 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत अपराध क्रमांक 106/2026 दर्ज किया है। कंपनी से जुड़ीं और ऋण की गारंटर रहीं निकहत शमीस की मृत्यु हो चुकी है, इसलिए उनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई है। मामले में आगे की विवेचना जारी है।

