डिंडौरी। झनकी गांव में शनिवार का दिन एक परिवार के लिए जिंदगी का सबसे भयावह दिन बन गया। खेलते-खेलते आठ वर्षीय मासूम शिवम पंद्राम अचानक खुले पड़े सूखे बोरवेल में जा गिरा। गहरे अंधेरे गड्ढे में फंसा मासूम घंटों तक रोता-बिलखता रहा। उसकी चीखें सुनने वाला कोई नहीं था। ऊपर गांव की जिंदगी सामान्य चल रही थी, जबकि नीचे एक मासूम जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही थी।
सुबह करीब 10 बजे शिवम घर के पास खेल रहा था। तभी अचानक उसका पैर फिसला और वह खुले बोरवेल में जा गिरा। आसपास कोई मौजूद नहीं था। मासूम मदद के लिए पुकारता रहा, लेकिन उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं मिला। बंद अंधेरे गड्ढे में फंसा बच्चा डर और दर्द से कांपता रहा।
कुदरत को शायद कुछ और मंजूर था। इसी दौरान गांव से गुजर रहे ग्रामीण थान सिंह की साइकिल अचानक खराब हो गई। वे सड़क किनारे रुके ही थे कि उन्हें कहीं से बच्चे के रोने की हल्की आवाज सुनाई दी। पहले उन्हें लगा शायद कोई घर के अंदर रो रहा होगा, लेकिन जब आवाज लगातार आती रही तो उन्होंने आसपास तलाश शुरू की।
आवाज का पीछा करते हुए जब थान सिंह खुले बोरवेल के पास पहुंचे तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। अंदर झांककर देखा तो मासूम शिवम अंधेरे में फंसा रो रहा था। यह दृश्य देख ग्रामीण भी घबरा गए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। बिना अपनी जान की परवाह किए उन्होंने बच्चे को बचाने की कोशिश शुरू कर दी।
करीब आधे घंटे तक चले संघर्ष के बाद आखिरकार शिवम को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। जैसे ही बच्चा बाहर आया, मां-बाप उसे सीने से लगाकर फूट-फूटकर रो पड़े। गांव में मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। हर कोई यही कहता नजर आया कि यदि कुछ देर और हो जाती, तो बड़ा हादसा हो सकता था।
बताया जा रहा है कि यह सूखा बोरवेल वर्ष 2023 में नलजल योजना के तहत खोदा गया था। पानी नहीं मिलने पर इसे बंद बताया गया था, लेकिन हादसे के वक्त यह पूरी तरह खुला मिला। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जिम्मेदारों की लापरवाही का खामियाजा कब तक मासूम बच्चों को भुगतना पड़ेगा? गांव के लोगों में घटना के बाद भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने प्रशासन से खुले पड़े सभी बोरवेल तत्काल बंद कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।





