(जनधारा डेस्क) अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के संभागीय अध्यक्ष राम कुमार गर्ग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार वर्ष 2010 के पूर्व नियुक्त देशभर के लगभग 51 लाख शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया था। इस निर्णय के चलते लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के सामने नौकरी पर संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई थी, क्योंकि परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति की संभावना बनी हुई थी।
वहीं इस फैसले के विरोध में अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा द्वारा प्रदेश स्तर पर व्यापक आंदोलन चलाया गया। मोर्चा के नेतृत्व में सभी विकासखंडों एवं जिलों में शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किए। इसी क्रम में 18 अप्रैल को मुख्यमंत्री के नाम एक विशाल अनुरोध महारैली निकालकर टीईटी अनिवार्यता से राहत प्रदान करने की मांग उठाई गई। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने भाग लेकर अपनी चिंता और समस्याओं को सरकार तक पहुंचाया।
राम कुमार गर्ग ने बताया कि शिक्षकों की मांग को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सकारात्मक पहल की। राज्य सरकार द्वारा 17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में शिक्षकों के पक्ष में रिव्यू पिटीशन दायर की गई, जिसमें न्यायालय से पूर्व आदेश पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया है। यह कदम शिक्षकों के लिए राहत की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उन्होंने आगे बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को स्वीकार करते हुए 13 मई को ओपन कोर्ट में सुनवाई की तिथि निर्धारित की है। इस सुनवाई में राज्य सरकार शिक्षकों का पक्ष मजबूती से रखेगी और यह प्रयास किया जाएगा कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को राहत मिल सके।
मोर्चा के संभागीय अध्यक्ष ने विश्वास जताया कि सरकार के ठोस प्रयासों से शिक्षकों को सकारात्मक परिणाम मिलेगा और उनकी सेवा सुरक्षित रह सकेगी। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल रोजगार का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता और अनुभवी शिक्षकों के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। अंत में राम कुमार गर्ग ने शिक्षकों के हित में रिव्यू पिटीशन दायर करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार एवं मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आशा जताई कि न्यायालय से शिक्षकों को राहत प्रदान करने वाला निर्णय सामने आएगा।
