डिंडौरी। परदेस में तीन महीने से फंसे 26 मजदूरों की बेबसी आखिरकार खत्म हो गई। जिला प्रशासन की सक्रिय पहल और एक स्वयंसेवी संस्था के सहयोग से तेलंगाना के भद्राद्री जिले में बंधन जैसी स्थिति में काम कर रहे मजदूरों को सकुशल मुक्त कराकर गुरुवार को डिंडौरी वापस लाया गया। अपने घर पहुंचते ही मजदूरों के चेहरों पर खुशी और राहत साफ नजर आई।
वापसी के बाद सभी मजदूरों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। सबसे बड़ी राहत यह रही कि प्रशासन ने उनकी लंबित मजदूरी का भुगतान भी सुनिश्चित कराया। कुल 5 लाख 96 हजार रुपए मजदूरों को दिलाए गए, जिससे उनके परिवारों में खुशी का माहौल है।
इस मामले की शुरुआत 31 मार्च को आयोजित जनसुनवाई से हुई थी। मजदूर लखन मरावी की बेटी रोशनी ने कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया से अपने पिता सहित अन्य मजदूरों को वापस लाने की गुहार लगाई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल श्रम, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम गठित कर कार्रवाई के निर्देश दिए।
जानकारी के अनुसार मेहंदवानी जनपद पंचायत अंतर्गत सुखलोंडी, पिंडरुखी और धनगांव गांवों के ये मजदूर 10 जनवरी को ठेकेदारों के साथ मिर्ची तोड़ने तेलंगाना गए थे। तय समय पूरा होने के बावजूद न तो उन्हें मजदूरी दी जा रही थी और न ही घर लौटने दिया जा रहा था। परेशान मजदूरों ने टोल फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया और तेलंगाना प्रशासन के सहयोग से सभी मजदूरों को सुरक्षित वापस लाया गया।
कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने मजदूरों से अपील की है कि वे अधिक मजदूरी के लालच में दूसरे राज्यों में जाने से बचें और किसी भी ठेकेदार के बहकावे में न आएं। उन्होंने आश्वस्त किया कि जिले में ही रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं और पात्र हितग्राहियों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा।
