Crime News : स्व-सहायता समूह की राशि व्यापारी को दी ! संगठन की अध्यक्ष और व्यापारी के विरुद्ध दर्ज FIR….

Rathore Ramshay Mardan
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मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले जनपद पंचायत सिहोरा अंतर्गत ग्राम अमगवां में संचालित स्व-सहायता समूह और ग्राम संगठन में बड़ी वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। संगठन की राशि को नियम विरुद्ध तरीके से व्यापारी को देने के आरोप में पंचशील ग्राम संगठन की अध्यक्ष श्रीमती कंचन नामदेव और व्यापारी विकास जैन के खिलाफ थाना खितौला में एफआईआर दर्ज कराई गई है।

— ये रहा पूरा मामला 

जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई जिला पंचायत जबलपुर के निर्देश पर गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर की गई है। समिति ने वर्ष 2018 से संचालित संकुल स्तरीय संगठन (सीएलएफ), ग्राम संगठनों एवं स्व-सहायता समूहों के वित्तीय लेन-देन और अभिलेखों की जांच की। जांच के दौरान वसुंधरा सीएलएफ एवं उसके अंतर्गत आने वाले पंचशील ग्राम संगठन के दस्तावेजों और बैंक खातों का गहन परीक्षण किया गया।

 

 

जांच में पाया गया कि संगठन की अध्यक्ष कंचन नामदेव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए समूह की राशि का अनाधिकृत आहरण किया और विभिन्न माध्यमों से रकम का लेन-देन किया। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने स्वयं के नाम पर लाखों रुपये निकाले, साथ ही अन्य व्यक्तियों के नाम और नगद के रूप में भी राशि आहरित की गई।

 

 

सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि समूह के खाते में प्राप्त उपार्जन राशि में से करीब 28 लाख 80 हजार रुपये व्यापारी विकास जैन को भुगतान किए गए, जो नियमों के विपरीत है। इसके अलावा अन्य लेन-देन में भी व्यापारी की संलिप्तता पाई गई है।

 

 

जांच में यह भी सामने आया कि कंचन नामदेव राधा स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष भी हैं, जहां से भी नगद और व्यक्तिगत खातों में राशि आहरण के मामले सामने आए हैं। समिति ने इसे स्पष्ट रूप से वित्तीय अनियमितता और गबन मानते हुए दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की थी।

 

 

इसी के आधार पर जनपद पंचायत सिहोरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा थाना खितौला में आवेदन प्रस्तुत कर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 316(5) एवं 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज कराया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

 

 

प्रशासनिक स्तर पर इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लिया जा रहा है और उच्च अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दे दी गई है। मामले ने स्व-सहायता समूहों में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

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