MSME Loan Fraud : फर्जी रसीद और नकली GST नंबर से MSME लोन, EOW ने बैंक मैनेजर समेत 5 पर दर्ज की FIR…..

Rathore Ramshay Mardan
7 Min Read

 

भोपाल। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW), भोपाल ने फर्जी दस्तावेजों और कथित मिलीभगत के जरिए MSME लोन स्वीकृत कर राशि निकालने के मामले में बैंक शाखा प्रबंधक सहित पांच आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। EOW की जांच के अनुसार मामले में बैंक ऑफ महाराष्ट्र की एमपी नगर शाखा से लाखों रुपये के ऋण स्वीकृत कराए गए, जबकि शिकायतकर्ताओं को कथित तौर पर मशीनें उपलब्ध नहीं कराई गईं।

 

EOW के मुताबिक भोपाल के एक युवा व्यवसायी की शिकायत पर जांच शुरू की गई थी। शिकायतकर्ता के नाम पर उसकी जानकारी के बिना करीब 10 लाख रुपये का MSME लोन स्वीकृत कराया गया। जांच में आरोप सामने आया कि बैंक शाखा प्रबंधक राहुल भोसले, फाइनेंशियल एडवाइजर राजीव राजपूत, विशाल इंटरप्राइजेस की प्रोपराइटर नईमा अली, संचालक कमर अली और ग्लोबल मार्केट्स की प्रोपराइटर उमर अली ने कथित रूप से मिलकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन प्रक्रिया पूरी कराई।

 

कुछ घंटों में पूरी कर दी गई लोन प्रक्रिया

 

जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता का लोन 21 मार्च 2024 को आवेदन से लेकर राशि जारी होने तक महज कुछ घंटों में पूरा कर दिया गया। EOW के अनुसार लोन से संबंधित दस्तावेज पहले ही बैंक में जमा कर दिए गए थे और शिकायतकर्ता से शाखा प्रबंधक के सामने तैयार दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। जांच में यह भी पाया गया कि बैंक की ओर से कथित मशीन सप्लायर फर्म का स्थल निरीक्षण नहीं किया गया और न ही शिकायतकर्ता को मशीन विक्रेता से मिलवाया गया।

 

मार्जिन मनी के नाम पर लगाई गईं कथित फर्जी रसीदें

 

EOW जांच में आरोप है कि लोन के लिए 4 लाख और 1.15 लाख रुपये की दो रसीदें लगाई गईं, जिनमें विशाल इंटरप्राइजेस को भुगतान दिखाया गया था। जांच के मुताबिक संबंधित भुगतान वास्तव में नहीं हुआ। EOW के अनुसार शिकायतकर्ता या उसके परिवार के खातों में भी इतनी राशि उपलब्ध नहीं थी, इसके बावजूद इन रसीदों को स्वीकार कर लोन स्वीकृत किया गया।

 

खाते में आई लोन की राशि, लेकिन मशीन नहीं मिली

 

जांच में यह भी सामने आया कि लोन की राशि विशाल इंटरप्राइजेस के बैंक खाते में गई, लेकिन शिकायतकर्ता को मशीन उपलब्ध नहीं कराई गई। EOW के अनुसार इसके बाद कथित तौर पर राशि को दूसरी फर्म के जरिए शिकायतकर्ता की मां के खाते में भेजा गया और वहां से अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया गया। जांच के मुताबिक 18 मार्च 2024 को 3.91 लाख रुपये और 22 मार्च को 3 लाख रुपये की राशि ट्रांसफर की गई। इसी दौरान फाइनेंशियल एडवाइजर को 50 हजार और शिकायतकर्ता के मामा को 2.46 लाख रुपये दिए जाने का भी उल्लेख जांच में किया गया है।

 

मशीन के बिना बीमा और CERSAI में पंजीयन

 

EOW की जांच में आरोप है कि मशीन उपलब्ध कराए बिना ही बैंक ने उसका बीमा करा दिया और CERSAI में पंजीयन भी कर दिया। बीमा की राशि शिकायतकर्ता के खाते से काटी गई। बाद में जब बैंक ने किश्त के लिए संपर्क किया, तब शिकायतकर्ता को पूरे मामले की जानकारी हुई। शिकायतकर्ता की ओर से मशीन उपलब्ध कराने वाली फर्म की कथित रसीदें और दस्तावेज बैंक को दिए जाने के बावजूद, EOW के अनुसार शाखा प्रबंधक ने बिना मूल प्रति देखे उन्हें सही मान लिया।

 

जांच में सामने आए अन्य लोन के मामले

 

EOW के अनुसार जांच के दौरान यह मामला अकेला नहीं मिला। मार्च 2024 में इसी शाखा से करीब 10-15 दिनों के भीतर पांच अन्य MSME लोन स्वीकृत किए जाने की जानकारी सामने आई। इनमें से कुछ मामलों में भी मशीन उपलब्ध नहीं कराई गई। जांच में एक प्रिंटिंग प्रेस संचालक को 9.90 लाख रुपये का लोन और 4 लाख रुपये की सीसी लिमिट दिए जाने का मामला सामने आया। कथित तौर पर मशीन मिलने के बाद भी नकली बिल के आधार पर 1.88 लाख रुपये GST के नाम पर काटे गए और बीमा राशि दो बार वसूल किए जाने की बात जांच में सामने आई।

 

इसी तरह एक महिला को करीब 7 लाख रुपये का लोन एक ही दिन में स्वीकृत किए जाने तथा मशीन उपलब्ध नहीं होने का मामला भी जांच में सामने आया। एक अन्य युवक के मामले में मार्जिन मनी के नाम पर 2.40 लाख रुपये नकद लिए जाने और मशीन उपलब्ध नहीं कराए जाने का आरोप है।

 

कई लोन NPA होने का भी उल्लेख

 

EOW के अनुसार जांच में सामने आए ये सभी लोन बाद में NPA हो गए। जांच एजेंसी का आरोप है कि मामलों की जानकारी होने के बाद भी शाखा प्रबंधक ने वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं दी और कथित रूप से पीड़ितों पर लोन चुकाने का दबाव बनाया।

 

जांच में मशीन सप्लाई करने वाली विशाल इंटरप्राइजेस के दस्तावेजों में दर्ज GST नंबर किसी अन्य व्यक्ति का पाए जाने का भी उल्लेख किया गया है। बैंक के GST पोर्टल पर फर्म के मालिक का नाम अलग दिखाई देने के बावजूद कथित तौर पर लोन स्वीकृत कर दिया गया। EOW ने इन तथ्यों के आधार पर 17 सितंबर 2026 को पांचों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 420 और 120-बी के तहत अपराध क्रमांक 99/2026 दर्ज किया है। मामले में आगे की विवेचना जारी है।

 

 

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