डिंडौरी। जिले में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के निर्माणाधीन कार्यों की हालिया समीक्षा में भारी लापरवाही सामने आई है। इसके बाद कलेक्टर, जिला पंचायत डिण्डौरी ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत डिण्डौरी प्रमोद कुमार ओझा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत अमरपुर लोकेश नारनोरे, परियोजना अधिकारी (संविदा) मनरेगा प्रदीप शुक्ला, और वरिष्ठ डाटा मैनेजर (संविदा) मनरेगा प्रवीण कुमार गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
बता दें कि यह कार्रवाई जिला कलेक्टर द्वारा विभिन्न निर्माणाधीन कार्यों की समीक्षा और निरीक्षण के बाद की गई। निरीक्षण में पाया गया कि जनपद पंचायत डिण्डौरी में नवीन सामुदायिक भवन 2024-25 के 2 कार्य और 2025-26 के 4 कार्य विगत 3 माह में प्रारंभ नहीं किए गए, जबकि 2 भवन कार्य केवल नींव स्तर तक ही सीमित हैं। इसी प्रकार आंगनबाड़ी भवनों में 18 कार्य अभी तक पूर्ण नहीं हुए और कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को हस्तांतरित नहीं किए गए।
विधानसभा निधि के तहत भी 2023-24 के 3 कार्य और 2024-25 के 4 कार्य अपूर्ण हैं। इसके अतिरिक्त, मनरेगा योजना में लक्षित लेबर बजट 17.29 लाख के विरुद्ध केवल 13.71 लाख (79.29%) ही उपलब्धि दर्ज हुई है, जबकि समीक्षा बैठकों और वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत द्वारा लक्ष्यानुसार कार्य बढ़ाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। गंगा जल संवर्धन अभियान में 735 कार्यों में से केवल 95 कार्य पूर्ण हुए हैं, जो कि 12.92 प्रतिशत ही है।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत अमरपुर लोकेश नारनोरे के क्षेत्र में भी स्थिति चिंताजनक पाई गई। यहां नवीन सामुदायिक भवन 2024-25 के 3 और 2025-26 के 4 कार्य अप्रारंभ हैं, जबकि आंगनबाड़ी भवनों में 6 कार्य अधूरे हैं। विधायक निधि के 2023-24 के 4 और 2024-25 के 2 कार्य भी पूर्ण नहीं हुए। मनरेगा योजना में लक्षित लेबर बजट 10.42 लाख में केवल 7.57 लाख (74.24%) की उपलब्धि हुई, और गंगा जल संवर्धन में 479 कार्यों में से 239 ही पूरे हुए हैं।
जिला स्तर पर परियोजना अधिकारी (संविदा) मनरेगा प्रदीप शुक्ला और वरिष्ठ डाटा मैनेजर (संविदा) प्रवीण कुमार गुप्ता के संबंध में भी लापरवाही पाई गई। निरीक्षण में यह तथ्य सामने आया कि एमआईएस रिपोर्ट का विश्लेषण और प्रतिदिन प्रगति प्रस्तुत नहीं की जा रही, जिससे मनरेगा योजनाओं की निगरानी प्रभावित हो रही है और जिले की प्रगति संभाग में दूसरे पायदान पर रह गई है।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि सौपे गए पदीय दायित्वों के निर्वहन में यह लापरवाही म.प्र. सिविल सेवा आचरण नियम 1965 और संविदा सेवा नियमों के विपरीत है, और अनुशासनात्मक कार्रवाई के योग्य है। अधिकारियों को 12 फरवरी 2026 तक स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। यदि 15 मार्च 2026 तक कार्य पूर्ण नहीं हुए और लेबर बजट लक्ष्य पूरे नहीं किए गए, तो अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ संविदा सेवा वृद्धि रोकने का निर्णय लिया जा सकता है।
सोर्स :— कार्यालय कलेक्टर, जिला पंचायत डिण्डौरी।

