मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत लंबित मजदूरी भुगतान और पर्याप्त रोजगार नहीं मिलने को लेकर डिंडौरी जिले में मजदूरों का आक्रोश लगातार गहराता जा रहा है। इसी क्रम में मजदूरों की आवाज उठाते हुए कांग्रेस विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने महामहिम राष्ट्रपति एवं राज्यपाल के नाम एडीएम डिंडौरी को ज्ञापन सौंपकर गंभीर स्थिति से अवगत कराया।
ज्ञापन में बताया गया है कि मनरेगा नियमों के अनुसार कार्य करने के 15 दिवस के भीतर मजदूरी भुगतान अनिवार्य है, लेकिन डिंडौरी जिले में नवंबर 2025 से अब तक हजारों मजदूरों को उनकी मेहनत की मजदूरी नहीं मिल पाई है। इससे गरीब और आदिवासी मजदूर परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ज्ञापन के अनुसार जिले में मनरेगा के तहत कुल 4227.74 लाख रुपये यानी 42 करोड़ 27 लाख 74 हजार रुपये की मजदूरी लंबित है। विकासखंडवार आंकड़ों में डिंडौरी विकासखंड में सबसे अधिक 1136.06 लाख रुपये की राशि बकाया है। इसके अलावा अमरपुर में 510.91 लाख, बजाग में 485.29 लाख, करंजिया में 324.32 लाख, मेहंदवानी में 621.08 लाख, समनापुर में 613.04 लाख, शहपुरा में 536.79 लाख तथा जलसंसाधन विभाग में 0.25 लाख रुपये की मजदूरी लंबित बताई गई है।
मजदूरी समय पर नहीं मिलने से मजदूरों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है। वर्तमान में जिले में मेला-मड़ई के आयोजन चल रहे हैं और 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का बड़ा पर्व भी आने वाला है, लेकिन मजदूरी न मिलने के कारण गरीब मजदूर परिवार इन सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में भाग नहीं ले पा रहे हैं। ज्ञापन में यह भी उजागर किया गया है कि जिले में इस समय 1 लाख 94 हजार 24 सक्रिय जॉब कार्ड हैं। मनरेगा अधिनियम के तहत प्रत्येक जॉब कार्डधारी परिवार को वित्तीय वर्ष में 100 दिन का रोजगार दिया जाना चाहिए, लेकिन अब तक केवल 2372 जॉब कार्डधारियों को ही 100 दिवस का रोजगार मिल पाया है। काम की कमी के चलते बड़ी संख्या में ग्रामीण मजदूरों को मजबूरी में पलायन करना पड़ रहा है।
कांग्रेस विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने मांग की है कि लंबित मजदूरी का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए और प्रत्येक जॉब कार्डधारी को 100 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 12 फरवरी 2026 तक मजदूरी भुगतान नहीं हुआ, तो 13 फरवरी 2026 को डिंडौरी जिला मुख्यालय में आंदोलन-प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री का पुतला दहन भी किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। मनरेगा मजदूरों की इस चेतावनी के बाद जिला प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है और अब सबकी नजरें शासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।


