— जनजातीय कार्य विभाग ने सभी जिलों से मांगे प्रमाणित सेवा अभिलेख, लापरवाही पर अटक सकती है सेवानिवृत्ति प्रक्रिया
भोपाल। मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग ने वर्ष 2026 में सेवानिवृत्त होने वाले व्याख्याताओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है। विभाग द्वारा जारी पत्र में सभी जिलों के सहायक आयुक्त एवं जिला संयोजकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सेवानिवृत्ति आदेश जारी करने से पहले संबंधित व्याख्याताओं की जन्मतिथि का विधिवत सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाए।
कार्यालय आयुक्त, जनजातीय कार्य, भोपाल से जारी इस पत्र में कहा गया है कि सेवा पुस्तिका में दर्ज जन्मतिथि की पुष्टि के लिए प्रमाण-पत्र एवं सेवा अभिलेखों की अभिप्रमाणित प्रति विभाग को भेजी जाए। बिना सत्यापन के किसी भी व्याख्याता का सेवानिवृत्ति आदेश जारी नहीं किया जाएगा।
पत्र के साथ प्रदेशभर के 43 व्याख्याताओं की सूची भी संलग्न की गई है, जो वर्ष 2026 में अधिवार्षिकी आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त होंगे। इस सूची में शहडोल, धार, खरगोन, जबलपुर, डिंडौरी ,बालाघाट, सीधी, मंडला, छिंदवाड़ा, बड़वानी, नर्मदापुरम, अनूपपुर सहित कई जिलों के व्याख्याता शामिल हैं। विषयवार देखें तो भौतिकी, रसायन, गणित, अंग्रेजी, हिंदी, जीवविज्ञान, कृषि, वाणिज्य, भूगोल, इतिहास और इंजीनियरिंग जैसे विषयों के शिक्षक इसमें सम्मिलित हैं।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई मामलों में सेवा पुस्तिका में दर्ज जानकारी और वास्तविक अभिलेखों में अंतर की स्थिति सामने आती है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह सत्यापन प्रक्रिया अनिवार्य की गई है। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय-सीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई तो संबंधित जिले की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इस निर्देश के बाद सभी जिलों में संबंधित व्याख्याताओं के सेवा अभिलेखों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया तेज हो गई है, ताकि समय पर सेवानिवृत्ति आदेश जारी किए जा सकें। देखें पूरी लिस्ट…



