डिंडौरी। पच्चीस से तीस सालों से नियमित सेवाएं दे रहे शिक्षकों की समस्याओं का समाधान न होने के चलते जिले के शिक्षक लामबंद हो गए हैं। शिक्षक संयुक्त मोर्चा के प्रांतीय आह्वान पर आज डिंडौरी के दीदी कैफे में सभी शिक्षक संगठनों की बैठक हुई, जिसमें टीईटी परीक्षा, वरिष्ठता और सेवा नियमों को लेकर अपनी मांगों को लेकर एकजुटता दिखाई गई।
शिक्षकों का कहना है कि 1998-99 से अल्प वेतन पर कार्यरत, बिना जीपीएफ के नाममात्र दो से तीन हजार की पेंशन या एनपीएस में काम कर रहे शिक्षक अब टीईटी परीक्षा की जद्दोजहद में फंसे हैं। 25 साल की वरिष्ठता खत्म कर 01/07/2018 को नई नियुक्ति देने और 2010 के नियमों को पूर्व नियमानुसार कार्यरत शिक्षकों पर थोपने के फैसलों से 50-55 वर्ष की उम्र के शिक्षकों की सब्र की सीमा टूट गई है।
बैठक में शिक्षक संघ, आजाद शिक्षक संघ, प्रांतीय शिक्षक संघ, ट्रायवल वेल्फेयर टीचर्स एसोसिएशन के प्रमुख पदाधिकारियों सहित महेन्द्र सिंह उद्दे, देवेंद्र दीक्षित, सनत तिवारी, तरूण कुमार ठाकुर, द्वारका मरावी, सुशील नागेश्वर, आनंद उइके, लल्लू परस्ते, रामकुमार चंदेल, मधु दीप उपाध्याय, जीवन मरावी, इकलाख हुसैन, श्रीमती दीपमाला गुप्ता, कमल सिंह गौतम, कुम्हरा लाल नंदा आदि उपस्थित रहे। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आठ अप्रैल को डिंडौरी जिले में “शिक्षक सम्मान बचाओ” रैली आयोजित की जाएगी। साथ ही शिक्षकों ने सड़क से संसद तक और न्यायालय में अपनी मांगों की लड़ाई लड़ने का ऐलान किया।
