डिंडौरी। जिले में वनग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को गति देने के लिए राजस्व एवं वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों का संयुक्त प्रशिक्षण आयोजित किया गया। कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया एवं वनमंडलाधिकारी डिंडौरी के मार्गदर्शन में आयोजित प्रशिक्षण में वनग्रामों से जुड़े भू-अभिलेख तैयार करने की प्रक्रिया और समय-सीमा को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
प्रशिक्षण में राजस्व विभाग के पटवारियों के साथ वन विभाग के 26 वनरक्षकों ने भाग लिया। मास्टर ट्रेनर्स ने MPSEDC से प्राप्त नक्शों के आधार पर वनग्रामों में काबिज भूमिस्वामियों को प्राप्त पट्टों के अनुसार आवश्यक भू-अभिलेख तैयार करने की प्रक्रिया समझाई। अधिकारियों और कर्मचारियों को मैदानी स्तर पर होने वाले कार्यों में राजस्व एवं वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए।
प्रशिक्षण के दौरान 15 दिवस की समय-सीमा में अधिकार अभिलेख, खसरा (फील्ड बुक), किस्तबंदी एवं जमाबंदी, पुनर्क्रमांकित रजिस्टर तथा दखलरहित भूमि से संबंधित निस्तार पत्रक और वाजिब-उल-अर्ज जैसे अभिलेख तैयार करने के संबंध में दिशा-निर्देश दिए गए।
अधिकारियों ने मैदानी अमले को निर्धारित समयावधि में अभिलेख तैयार करने के साथ उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य वनग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित करने की प्रक्रिया में आने वाले अभिलेखीय कार्यों को व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से पूरा करना है।
प्रशिक्षण में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व रामबाबू देवांगन, संयुक्त कलेक्टर भारती मेरावी, वन विभाग के अनुविभागीय अधिकारी सुरेंद्र सिंह जाटव सहित जिले के तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और वन रेंजर मौजूद रहे। समापन अवसर पर अधिकारियों ने संबंधित मैदानी अमले को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए निर्धारित समय-सीमा में प्रक्रिया से जुड़े सभी कार्य पूरे करने के निर्देश दिए।
